डॉ.सुषमा गुप्ता:भाई की याद(राखी और आज़ादी,विशेषांक-अगस्त 2017)

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डॉ.सुषमा गुप्ता:भाई की याद(कविता)

बस तस्वीरों में
रह गए मैं और तू….
भला ऐसे भी कोई रूठ के जाता है..
तेरी बहुत सी आवाजें
अनसुनी की मैंने …
अब रूठा यूँ …न सुनता है तू,न बुलाता है ..
खुली आँखों से,हर सू दिखता है
बंद आँखों में ,नज़र आता है तू …
तू मेरे बचपन,मेरी जवानी
जिंदगी का हिस्सा …
विदाई का सीना,डोली का कहार
सुख दुख का किस्सा ..
मेरी आत्मा ,मेरे दिल का
अहम् हिस्सा है तू …
देख लौट आ अब…पक्का वादा है ..
अब नही करूँगी,तेरा खाना झूठा…
नही छीनूँगी ,तेरी काटी सलाद..
नही बिगाड़ूँगी,तह तेरे कपड़ों की…
पहनना तू…वो सब अजीब से दुरंगे कपड़े …
नही टोकूंगी… नही कहूँगी
बंदर सा है तू ….
अब नही करूँगी …कोई भी शिकायत …
माँ पापा से तेरी…
देख तू तो हमेशा ,मान ही जाता है।
देख बहुत हो गया।
तेरे चले जाने का ,ये दर्द असहनीय है..
बस अब आ जा तू…
देख मैं फिर चली ,गली में देर रात
सहेलियों संग टहलने…
मुझे पता है ,अब तो झिड़कने
आयेगा ही तू …
देख बस कर अब …बहुत हो चुका
मेरा धीरज जा रहा है…
तेरे सब नखरे ,जी सदके….
ये राखी चमकीली है..ये धागा सादा है..
ये अच्छा वो गंदा ,सब….सब जी सदके…
अपनी पसंद वाली ,राखी तो पहेनगा तू??
और देख अब ,होली भी आ गई है …
चल अच्छा …,भिगो लियो मुझे
नही दौड़ लगाऊंगी
घर भर में …
रंग भी लगा लियो तू,देख सब कुछ तो
मान गई हूँ मैं..
मान जा न तू भी,,बोल दे न ……..
हाँ अभी आता हूँ सुष…जरा सा रुक तू..

डॉ.सुषमा गुप्ता
स्थाई पता: 327/सेक्टर 16A,फरीदाबाद ,पिन 121002,हरियाणा
ई मेल : suumi@rediffmail.com

 

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