डॉ.सुषमा गुप्ता:कभी तो(राखी और आज़ादी ,विशेषांक-अगस्त2017)

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डॉ.सुषमा गुप्ता:कभी तो(संस्मरण)

किसी अपने के होने न होने का अहसास उसकी अक्समात मौत से होता है क्या ??
फिर मुझे क्यों नही हुआ उस वक्त ??
उस पल जब उस अपने का पार्थिव शरीर था सामने … तब बेहद बेहिसाब रोष था मन में … कि ये भी कोई बात हुई । यूँ भी कोई करता है भला। ऐसे कैसे चला गया ये।
…..पर
बाकी बचे अपनों की हालत इस कदर बेहाल थी कि उन्हें संभालने में अहसास ही नही हुआ कि मेरा अपना एक हिस्सा हमेशा के लिए कट गया। जैसे तैसे जिंदगी के जोड़ तोड़ ने मुझे बांधे रखा और मैंने अपनी यथासंभव कोशिश कर बाकी सबको।
पर ये अंदर अंदर रोज़ क्या दरक जाता है मेरे अंतस में अब….
इस कदर तो पहले भी कभी याद नही आया वो जैसे अब आता है ।
अब जब अपने ही घर के बच्चों को वैसे ही लड़ते झगड़ते मानते रूठते देखती हूँ तो उसके साथ गुज़ारे हज़ारों लम्हें मेरी आँखों के आगे एक पल में तैर जाते है । घर के किसी कोने में आँसू छिपाती हूँ कभी । तो कभी बाथरूम में सारे नल खोल ज़ार ज़ार रोती हूँ चीखती हूँ छटपटाती हूँ उससे न मिल पाने की बेबसी पर।
ये कैसा दर्द है । इतना तो तब भी नही हुआ था जब वो लाश बना घंटों मेरी आँख के आगे सोया था।
आज एक शाॅपिग माॅल में एक राखी के स्टाल के आगे हर गए साल की तरह बड़ी खुशी से खड़ी हुई मैं और अगले ही पल…. हकीकत कौंध गई ज़हन में । इस बुरी तरह कांपी मेरी आत्मा मेरा मन मेरा शरीर कि चक्कर ही आ गया …लोग न संभालते तो सिर फटना निश्चित था।
हैरान हूँ ये कैसा दर्द है ।
तब जब सब घर मे चीख चीख कर रो रहे थे मैं शांत खड़ी थी एक कोने में । बस ये फिक्र थी कि सबको संभालूं कैसे । और जैसे जैसे वक्त बीत रहा है मुझे ये नही समझ आ रहा अब खुद को संभालूं कैसे।
झूठ बोलते है लोग… वक्त ज़ख्म भर देता है। सरासर झूठ है ये । बीतता वक्त तो और चीर देता है

कोई तो जरिया होगा ….. कभी तो आजा मिलने …

डॉ.सुषमा गुप्ता
स्थाई पता: 327/सेक्टर 16A,फरीदाबाद ,पिन 121002,हरियाणा
ई मेल : suumi@rediffmail.com

 

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