डॉ.पूर्णिमा राय:रक्षाबंधन(राखी और आज़ादी,विशेषांक-अगस्त 2017)

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डॉ.पूर्णिमा राय:रक्षाबंधन

     (कुण्डलियाँ छंद)

1)
रक्षा बन्धन आ गया, बहना का ले प्यार।
दिवस ‘पूर्णिमा’ कर सजे,रक्षाबंधन तार।।
रक्षाबंधन तार, राखियाँ प्यारी चमके ।
शाश्वत केवल प्यार, बहन के मुख पे दमके।
राखी का उपहार ,मुझे यह दे दो भिक्षा ।
महके आँगन प्यार, बहन की हरदम रक्षा।।
*****************************************
2)
मनमोहक राखी चमक,फैली चारों ओर।
बहन-प्रेम के सामने,किसका चलता जोर।।
किसका चलता जोर,बदल गई मन भावना।
ये रेशम की डोर,फैलाये सद् भावना।।
देखें गर इतिहास ,मिला कर्मवती को हक।
जागे मन विश्वास ,धर्म भाई मनमोहक।।
डॉ.पूर्णिमा राय,
शिक्षिका एवं लेखिका
जन्म-तिथि–28दिसम्बर
योग्यता — एम .ए , बी.एड, पीएच.डी (हिंदी)
वर्तमान पता– ग्रीन एवनियू,घुमान रोड , तहसील बाबा बकाला , मेहता चौंक१४३११४,
अमृतसर(पंजाब)
ईमेल-drpurnima01.dpr@gmail.com
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1 COMMENT

  1. बहुत खूबसूरत रक्षाबंधन( कुंडलिया छंद) बधाई प्रिय पूर्णिमा जी

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