आभा सिंह:देश कोई चीज़ नहीं(राखी और आज़ादी,विशेषांक-अगस्त 2017)

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आभा सिंह:देश कोई चीज़ नहीं(गज़ल)

देश कोई चीज़ नहीं एक भाव होता है,
हमवतनों का शामिल ख़्वाब होता है।
नदी, वर्षा, पंछी,आदमी कुछ भी नहीं,
अपने हैं बस इसलिए चाव होता है।
इसकी तारीफ़ से हो रहा दिल दुगना,
बुराई से चाक़ बेहिसाब होता है।
रहे जज़्बों में ये चमन सा ही ज़िंदा ,
ज़ख़्मों और लहू में खिंचाव होता है।
सर पे कफ़न और सीने में लावा,
सिरफिरों को मरने का ताव होता है।
इससे इश्क़ करना कोई आसाँ नहीं ,
आग में झुलसना बेहिसाब होता है।
धार पे चलना है इसके लिये जीना,
इस तरहा जीने में रुआब होता है।
दूर बैठे बस याद ही कर पायेंगे,
शिद्दत से हुड़कना बेताब होता है।
हर बार हों पैदा बस इसके लिए ही,
दिल में ये चस्का लाजवाब होता है।

आभा सिंह
80/ 173, मध्यम मार्ग, मान सरोवर ,जयपुर 302020 राज.

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