अँजना बाजपेई:आजा़दी का ताज(राखी और आज़ादी,विशेषांक-अगस्त 2017)

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अँजना बाजपेई:आजा़दी का ताज(कविता)

शत शत नमन अमर शहीदों को ,
अपने लहू से वे आजादी का इतिहास रच गये, पराधीनता की बेड़ियां काटकर
भारत माँ के मस्तक पर आजादी का ताज रख गये
सपनों को साकार करने की हमें आजादी दे गये ,
गर्व से जीने का सम्मान दे गये ,
शान से तिरंगा लहराने, राष्ट्र गीत गाने का अवसर दे गये …
बहुत महंगी है यह आजादी
इसे संभालकर रखना होगा ,
इसकी खातिर अमर शहीद अपनी जान पर खेल कर सर्वस्व देश के नाम कर गये …..
तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा
सुभाष चंद्र बोस ने कहा था वो सच करके दिखा गये ,
अहिंसा की राह पर चलकर गाँधी जी अँग्रेजो को दिन में तारे दिखा गये ,
चन्द्र शेखर आजाद अंग्रेजी साम्राज्य की नींव हिला गये ,
शहीद भगतसिंह हँसते-मुस्कुराते आजाद देश का सपना आँखों में लिये फाँसी पर चढ़ गये ..
इस आजादी का मान हमें रखना होगा ,
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई बनकर बहुत लड़ लिये
हमें अब हिन्दुस्तानी बनना होगा
एकता में ही शक्ति है हमारे अमर शहीद बता गये …
आजादी की जंग में जिन्होंने कुर्बानी दी
वो कोई एक मजहब या एक धर्म के नहीं थे
सारे हिन्दुस्तानी थे ,सारे भाई-भाई थे
आपसी स्वार्थ से बढ़कर देशहित होता है ये पाठ हमें पढ़ा गये ..

अँजना बाजपेई
जगदलपुर (बस्तर )
छत्तीसगढ़..
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