डॉ.पूर्णिमा राय: संपादकीय(राखी और आज़ादी,विशेषांक-अगस्त 2017)

2
151

0) डॉ.पूर्णिमा राय: संपादकीय

सभी को रक्षाबंधन एवं स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!!

अचिन्त साहित्य की ओर से (अगस्त– 2017 विशेषांक ) “राखी और आज़ादी” विषय व्यापक फलक पर पर्वों और त्योहारों की शृंखला की एक मजबूत कड़ी है।इसमें एक तरफ रक्षा की भावना एवं दूसरी ओर स्वतंत्रता का भाव विद्यमान है।भाई बहन की रक्षा करे और उसे स्वंत्रता दिलवाये– समाज में स्वच्छंद विचरण करने की ,अपने सपनों को साकार करने की,खुले आसमान तले निर्विध्न घूमने की!!
शायद यही कारण रहा कि इस विशेषांक का नाम “राखी और आज़ादी” रखा गया।आज़ाद भारत देश के स्वप्न में अगर बहन ही बँधी रहेगी ,अर्थात् गुलाम एवं संकुचित मानसिकता की शिकार रहेगी,वहाँ आज़ादी का अर्थ ही धूमिल हो जायेगा।सही मायनों में हम तभी स्वतंत्रता का जश्न मना पायेंगे जब तक हम नारी को खुली हवा में साँस लेने देंगें।इस विशेषांक में शामिल रचनाकारों की रचनाएं अलग अलग भावनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति करती हैं ।यथा—-
मीनाक्षी मेहरा का आलेख “बेटी स्वयं राखी ” समाज के बुद्धिजीवी वर्ग को झिंझोड़ता है,सभी भाइयों को सचेत करता है कि बहन को इस काबिल बनायें कि वह समाज में विचरण करते आ यही समस्याओं का सामना कर सके
—अंजना वाजपेई अपने आलेख” राखी” में इस पर्व के स्वरुप पर प्रकाश डालती हैं।
—डॉ.शील कोशिक की लघुकथा” मोह के धागे” भाई बहन के बीच हँसी ठिठोली को दर्शाती आधुनिकता में धन के महत्व को नजरअंदाज करती है.. जब भाई द्वारा पाँच सौ रुपये का नोट बहन द्वारा वापिस किया जाता है और भाई को मिठाई खिलाती है।प्रेम की मार्मिकता की सटीक अभिव्यक्ति हुई है।
—डॉ.सुषमा गुप्ता का संस्मरण “कभी तो”इतना हृदयस्पर्शी है कि पढ़ते पढ़ते आँखे कब छलकी ,पता न चला।आपकी कविता” भाई की याद” भाई के चले जाने के पलों के दर्द को ब्याँ करती है।
—-नीरजा मेहता ने बाखूबी बचपन की यादों को ,भाइ बहनों के आपसी प्रेम को संस्मरण” कोहनी से कलाई” तक में दर्शाया है।
—-जियाउल हक की लघुकथा” उपहार” बचपन की मासूमियत का यथार्थवादी ढंग से अवलोकन करती है।
—-डॉ.प्रतिभा माही“”नाता भैया तोड़ न लेना”गीतिका बहुत हृदयस्पर्शी है ।
—-रुबी प्रसाद की लघुकथा “बंधन” एक पल में आँखों के सामने सब खत्म हो जाता है,का हृदयस्पर्शी अंकन किया गया है।
—-अशोक गोयल पिलखुवा अपने “रक्षाबंधन” गीत में नारी पर हो रहे अत्याचारों के प्रति चिन्तित हैं।  

—-अनीला बत्रा दिल का रिश्ता कविता में राखी के अमोल अहसोस को निशब्द मानती हैं
–सत्या शर्मा कीर्ति का व्यंग्य “मैं आज़ाद हूँ” मानवीय समाज द्वारा आजादी की जड़े खोखली करने को व्यापक स्तर पर उद्घाटित किया गया है।
—केशव शरण की कविता “पन्द्रह अगस्त”तिरंगे का चक्र एक बार फिर घूम जाता इतिहास में…बहुत खूब बन पड़ी है।
—प्रमोद सनाढ्य प्रमोद का गीत” झंडा हिंदुस्तान”नपे तुले शब्दों में तिरंगे की महिमा का गुणगान करता है।
—-आशीष पाण्डेय की कविता “माटी “भारतीय मिट्टी की खूबसूरत रंगत को ब्याँ करती है।
—डॉ.शिवजी श्रीवास्तव का गीत “मेरा भारत महान है यारो” भारत देश की सभ्यता व संस्कृति का लय बद्ध रुप में अवलोकन करवाता है ।
—-आभा सिंह की” गज़ल देश कोई चीज़ नहीं “,भाव होता है…बेहतरीन भावनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति है।
अँजना वाजपेयी “आजादी का ताज”कविता में स्वतंत्रता की बात कर रही हैं।

—प्रेम गुप्ता मानी अपनी कविता में आज़ादी के सुंदर एवं निष्ठुर दोनों रुपों पर प्रकाश डालते हुये प्रकृति एवं मानवीय समाज के विभिन्न दृष्टान्त उपस्थित करती हैं।
—–दीपिका दीप्ति अपनी कविता में “नवभारत” की संकल्पना दिखाती हैं।
—-प्रशांत मिश्रा मन के “मुक्तक देश प्रेमी” एवं “कुंकुभ छंद कारगिल दिवस” वीर एवं ओज जज्बे का खूबसूरती से अवलोकन करवाती है।
—-डॉ.पूर्णिमा राय का गीत” सच्चा जश्न”लय बद्ध एवं खूबसूरत आजादी का रुप पेश करता है।
—-रेनु सिरोया कुमुदिनी का गीत “जय जय भारत”बहुत सुंदर गीत है जिसमें भारतीय तिरंगे एवं भारत की महिमा गायीं है ।
—-राजकुमार सोनी का गीत “स्वतंत्रता बनी रहे,सृजन के गीत गाइये”उम्दा गीत है।
—-कुमार गौरव “पागल” “आ जाना भैया” गीत में बहन की मन स्थिति का खूबसूरती से दिग्दर्शन करवाते हैं।
—धर्मेन्द्र अरोड़ा “राखी” गज़ल में बहन भाई की आपसे स्नेह को अभिव्यक्त करते हैं।
—अर्विना गहलौत की “गीतिका” राखी के पर्व को यादों के तूफान से संबंधित करके सृजन करती हैं।
—-कैलाश सोनी अपने गीत “बहना बुलाती है”में भाई के साथ बिताये पलों को अलग अंदाज में व्यक्त करते हैं।
—रेनु सिरोया कुमुदिनी “भाई बिन सूनी राखी” गीत के माध्यम से मनोभावना को दर्शाती हैं।
–डॉ.पूर्णिमा राय” रक्षाबंधन कुण्डलियाँ” एवं “भाई मेरा सबसे न्यारा गीत” क्रमशः राखी के त्योहार की पवित्रता,पावनता को अभिव्यक्त करने के साथ-साथ भाई के प्रति अपने निश्चल प्रेम को प्रकट करती हैं।

डॉ.पूर्णिमा राय,
शिक्षिका एवं लेखिका
जन्म-तिथि–28दिसम्बर
योग्यता — एम .ए , बी.एड, पीएच.डी (हिंदी)
वर्तमान पता– ग्रीन एवनियू,घुमान रोड , तहसील बाबा बकाला , मेहता चौंक१४३११४,
अमृतसर(पंजाब)
drpurnima01.dpr@gmail.com

Loading...
SHARE
Previous articleकैलाश सोनी “सार्थक” :अनोखी प्रीत(राखी और आज़ादी,विशेषांक-अगस्त 2017)
Next articleअँजना बाजपेई:राखी(राखी और आज़ादी,विशेषांक-अगस्त 2017)
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

2 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here