कलम के सिपाही मुँशी प्रेमचंद जी को नमन (31 जुलाई विशेष)

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मुंशी प्रेमचंद को नमन के साथ
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ईदगाह पर जाते ही
बहुत याद आ जाते हैं प्रेमचंद
मेले की दुकानों में
मनोरंजन के लिए बिकते
तरह तरह के सामान,खिलौने

हामिद की दादी उदास बैठी
कहाँ से लाए
ईद की सेवइयाँ
चिल्लर के लिए थे
बस रूपये तीन
दे दिए नाती को खुशी के लिए

पैसों की कमी सिखा देती है
एक झूठी हँसी
हामिद मन को संतोष कर कहता
खिलौने टूट जायेंगे एक दिन
सच तो यह नहीं थे जेब में
खरीदने लायक पैसे

बहुत सहना पड़ता है गरीबी को
बड़े सम्पन्न मित्रों के ताने
सुनकर ठहर जाता है
चेहरे पर दुख अवसाद
लगती है ठेस

इससे अच्छा है
बूढी दादी के लिए
खरीद लेना एक चिमटा
रोटी सेकते वक्त
नहीं चिकेंगे हाथ
पलट लिया करेंगी रोटी

खुशी खुशी छोड़ खिलौना
खरीद लाया चिमटा
देखा दादी ने
नाती की सोच बडों से बड़ी
कैसे हो गई

दादी की आँखों में आँसू
खुशी के हैं या
गरीबी पर रोना आया
यह तो अल्लाह जाने ।


——– शिव डोयले

अनेक पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशन

आकाशवाणी,दूरदर्शन से प्रसारण

गीत कविता व्यंग(गद्य /पद्य) लघुकथा,ग़ज़ल मुक्तक आदि।

क्षणिका संग्रह प्रकाशित। 

समकालीन कविता संग्रह एवं लघुकथा संग्रह हाइकु संग्रह प्रकाशनाधीन ।

सेवानिवृत्त। 

झूलेलाल कॅालोनी हरीपुरा,विदिशा 464001  ( म०प्र०)

मोबा०  09685444352

 

निम्न लिंक को अवश्य पढें

http://www.hforhindi.com/munshi-premchand-jeevan-parichay/

 

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