शहीद उधम सिंह (31 जुलाई) विशेष : भारत माँ का वीर सपूत

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शहीद उधम सिंह (31 जुलाई) विशेष :
भारत माँ का वीर सपूत !(राजकुमार ‘राज’)

मुझे याद है कक्षा 6 से 8 तक मेरे साथ मेरा एक दोस्त पढ़ा करता था..था हिन्दू परिवार से ,लेकिन केशधारी था…उसके पिता शहर के जाने माने कामरेड थे…अजीब नाम था मेरे उस दोस्त का…राम मुहम्मद सिंह…कुछ कुछ समझ थी कि नाम सर्वधर्मों के सम्मान का प्रतीक है…लेकिन यह नाम इतना खास था..इसका पता बहुत देर बाद चला ।
1940 में लंदन की एक अदालत में 40 साल पार कर चुके एक भारतीय से (जो कि एक अंग्रेज अफसर माइकल ओडवायर को कत्ल कर चुका था ) जज ने पूछा कि तुम्हारा नाम क्या है ??…उस भारतीय नौजवान ने कहा ; मेरा नाम राम मुहम्मद सिंह आज़ाद है…जी हां दोस्तो…यह भारतीय ,उद्दम सिंह था..जिसने जलियांवाला बाग के हत्याकांड के प्रमुख दोषी और उस समय पंजाब के गवर्नर माइकल ओडवायर को..(जिसने कि पुलिस अफसर जनरल डायर को निहत्थों पे गोली चलाने का हुक्म दिया था ) लन्दन जाकर गोलियों से भून कर भारतीयों के बहे खून का बदला लिया था ।….दोस्तो सुनाम में टहल सिंह और नारायणा देवी के घर में Dec 26 ,1899 को पैदा हुआ शेर सिंह मात्र 7 साल की उम्र में अनाथ हो गया था और अपने बड़े भाई मुक्ता सिंह के साथ अमृतसर के यतीमखाने में भर्ती हो गया था..दोनो भाइयों का नाम यहाँ उधमसिंह और साधू सिंह रजिस्टर हुआ । बड़े भाई साधू सिंह भी 1917 में चल बसे और उद्दम सिंह भरी दुनिया में अकेले रह गए ।
दोस्तो ! क्या उद्दम सिंह आने बड़े भाई साधु सिंह के जाने के बाद पूर्ण अनाथ हुए..? शायद नही…उद्दम सिंह ने सारे देश को अपना परिवार बना लिया था…अथाह दर्द छिपा था उसके सीने में देश की गुलामी के लिए…तभी तो भगत सिंह और राम प्रसाद बिस्मिल को अपना गुरु मानता था उधमसिंह!
उसने 13 अप्रैल 1919 की उस वैसाखी को देश अपने परिवार की जलती भुनती फसल देखी थी…जनरल डायर और उसके 90 अंग्रेज बंदूक धारियों को मौत बरसाते देखा था ..जलियांवाला बाग में…और वहीं जलियांवाला बाग की मिट्टी हाथ में लेकर कसम खाई थी उद्दम सिंह ने.. कि उसके सैंकड़ों भाई बहनों के हत्यारे जनरल डायर और पंजाब के गवर्नर माइकल ओडवायर को मौत की नींद सुलाकर ही दम लेगा…..बस फिर सफर शुरू हुआ प्रतिशोध का और एक परवाना पापियों को ढूंढने निकल पड़ा..देशवासिओं से चंदा इक्कठा करके अफ्रीका,ज़िम्बाब्वे,ब्राजील और अमेरिका से होता हुआ जा पहुंचा उस इंग्लैंड की धरती पर जहां जलियांवाला बाग हत्याकांड के दोनों पापी मौजूद थे…जनरल डायर भयंकर बीमारियों का शिकार होकर पहले ही मौत के मुंह में समा चुका था ।जलियांवाला बाग हत्याकांड के 21 साल बाद 13 मार्च 1940 को रॉयल सेंट्रल एशियन सोसायटी की लंदन के काक्सटन हॉल में बैठक थी जहां माइकल ओ डायर भी वक्ताओं में से एक था। उधम सिंह उस दिन समय से ही बैठक स्थल पर पहुंच गए। अपनी रिवॉल्वर उन्होंने एक मोटी किताब में छिपा ली। इसके लिए उन्होंने किताब के पृष्ठों को रिवॉल्वर के आकार में उस तरह से काट लिया था, जिससे डायर की जान लेने वाला हथियार आसानी से छिपाया जा सके।….जैसे ही माइकल ओडवायर अपनी स्पीच खत्म करके अपने स्थान की तरफ बढ़ा.. उधमसिंह
ने उसे अपनी गोलियों का निशाना बनाकर वहीं ढेर कर दिया… सभा में भगदड़ मच गई..लेकिन उद्दम सिंह वही खड़ा रहा और अपनी गिरफ्तारी दे दी….13 जून 1940 उसी अदालत में जज ने यह भी पूछा कि तुमने और किसी को क्यों नही मारा..ओडवायर को एक औरत ने कंधे से थाम रखा था ,उसपर गोली क्यो नही चलाई ???? जवाब मिला ; वहां बाकी सारे बेकसूर महिलाएं और बच्चे थे..हम भारतीय महिलाओं पे हाथ नही उठाते और बच्चों से प्यार करते हैं ।…..इसी अदालत में राम मुहम्मद सिंह आज़ाद या उधमसिंह
को फांसी की सज़ा सुनाई गई..और 31 जुलाई यानी कि आज के दिन लन्दन की पेंटनविल्ले जेल में उद्दम सिंह ने अपने गले में शहादत की जयमाल पहन ली और देश के लिए कुर्बान हो गया…सन 1974 को आपकी अस्थियां भारत को सौंपी गई….शहीद ए आज़म उधमसिंह का नाम स्वर्णाक्षरों में देश की आज़ादी की गौरवगाथा में हमेशा कायम रहेगा …
एक बात शहीद उद्दम सिंह की इस गौरवभरी वीर गाथा से जरूर मिलती है कि…..
” दिल में आग हो तो पापी चाहे कितना भी शक्तिशाली हो..धरती के किसी भी कोने पे बैठा हो..उसका सर्वनाश किया जा सकता है..चाहे उसके लिए 21 साल ही प्रतीक्षा क्यों न करनी पड़े ।
देश का बेटा, उधमसिंह अमर रहे

राजकुमार राज,शिक्षक
स स स स्कूल ,बल कलाँ
9592968886

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1 COMMENT

  1. वीर सपूत की वीरगाथा प्रभावशाली।

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