महाकवि तुलसी जी की 520 वीं जयंती पर नमन!!

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महाकवि तुलसी जी की 520 वीं जयंती पर नमन

तुलसी ने ‘मानस’ को रचकर,
किया जगत का नवकल्याण।
जिनकी हर पंक्ति में बसते,
भारत के जन-जन के प्राण।।

महाकवि की राम कथा ने,
जन गण मन को शुद्ध किया ।
आत्महीन भारत को जिसने,
देकर ज्ञान प्रबुद्ध किया।
मानस को समझेंगे तो हम,
पाएंगे दुक्खो से त्राण।।
तुलसी ने मानस को रचकर,
किया जगत का नव कल्याण।।

कैसे हो रिश्ते-नाते सब,
कैसा हो सुंदर परिवार।
मात-पिता-बन्धु, पति-पत्नी,
कैसा हो उनका व्यवहार।
एक मिला आदेश पिता का,
किया पुत्र ने वन प्रस्थान।
तुलसी ने मानस को रचकर,
किया जगत का नव कल्याण।

सदाचार का पथ दिखलाता,
ग्रंथ विश्व का अनुपम है।
इसका कोटि-कोटि वंदन भी,
नहीं आराधन से कम है ।
गर ‘मानस’ जीवन में उतरे,
तो इसका सच्चा सम्मान ।
तुलसी ने मानस को रच कर,
किया जगत का नवकल्याण।
जिनकी हर पंक्ति में बसते
भारत के जन-जन के प्राण।।

गिरीश पंकज
जन्म – 1 नवंबर,1957
शिक्षा – एम.ए (हिंदी), पत्रकारिता
लेखन क्षेत्र–
विगत चालीस वर्षो से साहित्य और पत्रकारिता में सक्रिय , अनेक अखबारों में उप सम्पादक एवं सम्पादक भूमिका पर निभाई। गत दो दशकों से भारतीय एवं विश्व साहित्य के अनुवाद की पत्रिका ‘सद्भावना दर्पण’ का प्रकाशन-सम्पादन ,
प्रकाशित साहित्य—सात उपन्यास और पंद्रह व्यंग्य संग्रह सहित 55 पुस्तकें प्रकाशित।
सम्मान—
उपन्यास माफिया के लिए लुधियाना में ”लीलरांनी स्मृति सम्मान” । उपन्यास ”मिठलबरा की आत्मकथा’ के लिए करवट सम्मान (भोपाल) के अलावा व्यंग्य लेखन के लिए ही अट्टहास सम्मान, श्रीलाल शुक्ल व्यंग्य सम्मान(लखनऊ), लीलावती सृजन फाउंडेशन सम्मान (रांची), जगन्नाथराय शर्मा स्मृति सम्मान।
हिंदी सेवी सम्मान (त्रिनिदाद, वेस्ट इंडीज)आदि 10 से अधिक देशों का साहित्यिक प्रवास।
सम्पर्क – सेक्टर -3, एचआईजी-2/2 , दीनदयाल उउपाध्याय नगर, रायपुर- 492010

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