क्या बात करें( नवगीत)

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क्या बात करें( नवगीत)

अजब सी रीति दुनिया में,
लोग चलाया करते हैं!
बिना छेद की कश्ती को,
सागर में डुबाया करते हैं!
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लोगों की क्या बात करें,
ये आया जाया करते हैं!
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पहले तो ज़ख्म दिया करते,
फिर नमक लगाया करते हैं!
दूजों का दिल तोड़ के अकसर,
दिल को बहलाया करते हैं!
:::::::::::::::::::::::::::::::::::::::
लोगों की क्या बात करें,
ये आया जाया करते हैं!
:::::::::::::::::::::::::::::::::::::::
जालिम और मगरूर के आगे,
ये सर को झुकाया करते हैं!
बेबस और लाचार के ऊपर,
ये तो मुस्काया करते हैं!
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लोगों की क्या बात करें,
ये आया जाया करते हैं!
:::::::::::::::::::::::::::::::::::::::
कभी-कभी तो ये देखो,
रावण बन जाया करते हैं!
इंसा तो बन पाते नही,
भगवान बताया करते हैं!
:::::::::::::::::::::::::::::::::::::::
लोगों की क्या बात करें,
ये आया जाया करते हैं!
:::::::::::::::::::::::::::::::::::::::
धर्मेन्द्र अरोड़ा “मुसाफ़िर”
संपर्क:मकान न;1539,न्यू हाऊसिंग बोर्ड कालोनी,पानीपत
(हरियाणा)
ईमेल: dharmenderarora.
rajyogi@gmail.com
9034376051
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