मेरो कान्हा

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मेरो कान्हा,अति निराला (गीत)

समझ न आये तेरे रंग की
गोरा है या काला है…
जिसके भी प्याले को देखूं
तेरे नाम की हाला है…
पीले में पीताम्बर   दिखता
नीले में नीलाम्बर है…
न जाने सब लोग क्यों कहते
देवकीनन्दन काला है…
जब भी तेरी धुन बजती है
राधा रानी गाती है…
न जाने अब कैसे बोलूं
मोहन मुरली वाला है….
जब भी राधे-राधे बोलूं
तेरी सूरत दिखती है….
ना जाने यह नशा है कैसा
कैसी यह मधुशाला है….
जिसने अस्त-व्यस्त कर डाला
वह गोकुल का ग्वाला है…
चलो राज..सावन रस ढूंढे
हिरदै में भड़की ज्वाला है….
सदा ही थाम लिया है उसने
वो सबका रखवाला है……
कभी राधा,कभी मोहन बनकर
सब पे जादू डाला है…..

राजकुमार ‘राज”,अमृतसर
9592968886

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2 COMMENTS

  1. कृष्ण की भक्ति में डूबे हृदय की सरस् भावपूर्ण रचना।बधाई राज जी।

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