कैसे (गज़ल)

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कैसे (गज़ल )
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दिल में आस जगायें कैसे।
प्रेम की ज्योत जलायें कैसे।
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कीचड़ भरा है मँझधारो में।
हम नैया पार लगायें कैसे।
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नीयत खराब यहाँ पे सबकी।
मंदिर-मस्जिद हम जायें कैसे।
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टूटी नहीं नफरत की लाठी।
प्रीत की धुन बजायें कैसे।
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दलीलें सब की अपनी-अपनी
मन का भ्रम मिटायें कैसे।
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सब लोगों के अलग राग हैं
गज़ल “जिया” की सुनायें कैसे।
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जियाउल हक
जैतपुर सारण बिहार
स्नातक विज्ञान & इंडस्ट्रीयल एण्ड फायर इंजीनियर।
पिन कोड- 841205

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3 COMMENTS

  1. तहेदिल से धन्यवाद इस आयोजन मंडली के सभी सदस्य को।

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