अपने पहरेदार बनो तुम 

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अपने पहरेदार बनो तुम 

ये जीवन एक महासमर है ,
किसी में साहस ,किसी में डर है ,
जीवन के इस समर में उतरो,
खुद अपनी तलवार बनो तुम !
अपने पहरेदार बनो तुम !

बाधा तो निश्चित आएगी ,
बिजली कड़क -कड़क जाएगी ,
अँधियारी रातें भी होंगी ,
दर्द भरी बातें भी होंगी ,
जूझो..उलझो !हर मुश्किल से ,
और विजय का हार बनो तुम !

अपने पहरेदार बनो तुम !

मत रोओ चीखो ,चिल्लाओ
अपनी शक्ति आप जगाओ !
तुम बेबस लाचार नहीँ हो ,
अपनी राहें आप बनाओ !

उतर पड़ो जग की नदिया में ,
अपने खेवनहार बनो तुम !

अपने पहरेदार बनो तुम !

कठिनाई तुमको तोलेगी ,
हर दुविधा पीछे हो लेगी ,
जब तुम खुद को सिद्ध करोगे ,
तभी सफलता पट खोलेगी !

अपनी मेहनत और लगन से –
हर सपना साकार करो तुम !

अपने पहरेदार बनो तुम !

जब साहस डगमग हो जाए ,
दिशा तुम्हारी जब खो जाए ,
तब तुम अपना चिंतन करना ,
अपनी कमजोरी से लड़ना !

घोर अँधेरा जब छा जाए ,
तब जलता अंगार बनो तुम !

अपने पहरेदार बनो तुम !

परम पिता ने हर प्राणी के ,
भीतर अद्भुत शक्ति दी है !
किसी ने खुद को जान लिया है ,
किसी ने खुद की हत्या की है !

अपने अंतस को पहचानो ,
शक्ति का भंडार बनो तुम !

अपने पहरेदार बनो तुम !

नन्हे – नन्हे बच्चों जैसा ,
मन को निर्मल..पावन रक्खो ,
प्रेम सुधा से सींचें सबको
भीतर ऐसा सावन रक्खो !

खुद महके..जग को महकाए,
फूलों का संसार बनो तुम !

अपने पहरेदार बनो तुम !

कभी वक्त को व्यर्थ न खोना ,
वक़्त है हीरा..चाँदी…सोना !
अगर समय को कुचला तुमने ,
निश्चित तुम्हें पड़ेगा रोना !

पल -पल का उपयोग करो तुम ,
अम्बर का विस्तार बनो तुम !

अपने पहरेदार बनो तुम !

डॉ.शशि जोशी ,सल्ट ,अल्मोडा ,उत्तराखंड

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