मैं कितनी बार गिरा हूँ :नेल्सन मंडेला(जन्मदिवस 18जुलाई)

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मैं कितनी बार गिरा हूँ : नेल्सन मंडेला(जन्मदिन पर विशेष 18जुलाई)

“मेरी सफलता को देखकर कोई राय मत बनाइए, आप देखिए कि मैं कितनी बार गिरा हूँँ और फिर दोबारा कैसे अपने पैरों पर खड़ा हुआ हूँ” ।….ये शब्द हैं ,दक्षिणी अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला के!!दक्षिणी अफ्रीका की मबासा नदी के किनारे ट्राँस्की के मवेजों गाँव में ‘नेल्सन रोहिल्हाला मंडेला’ का 18 जुलाई, 1918 को जन्म हुआ था। उनके पिता ने उन्हें नाम दिया ‘रोहिल्हाला’ अर्थ पेड़ की डालियों को तोड़ने वाला या फिर प्यारा शैतान बच्चा। नेल्सन के पिता ‘गेडला हेनरी’ गाँव के प्रधान थे। उनका परिवार परम्परा से ही गाँव का प्रधान परिवार था। इनके पिता की 4 पत्नियां और ये कुल 13 भाई बहन थे..9 बहने और 4 भाई…नेल्सन तीसरे नम्बर के भाई थे…इनकी माता का नाम नोसकेनि था और इनके माता-पिता कोरे अनपढ़ थे । अपने परिवार में से स्कूल जाने वाले यह पहले बच्चे थे ।स्कूल के बाद कॉलेज की पढ़ाई करने नेल्सन अफ्रीका के शहर हाल टाउन गए जहां पर काले लोगों के लिए कॉलेज था । इन्होंने वहां वकालत पास की ।यही से 1944 को नेल्सन अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस में शामिल हुए और ऑलिवर टोम्बो नामक राजनीतिक व्यक्ति से काफी प्रभावित हुए ,यही आखिर तक उनके श्रेष्ठ मित्र रहे ।। इनकी विद्रोही प्रविर्ती को भांपते हुए अफ्रीका की गोरी सरकार ने 1952 में इनपर आम जनता से बातचीत करने पर प्रतिबंध लगा दिया था ।फिर 1961 में मंडेला को देश छोड़कर भागने के आरोप में बंधी बनाया गया लेकिन यब बेकसूर साबित हुए और पुनः 1964 में ई है देशद्रोह और लोगों में विद्रोही भावना उकसाने के लिए उम्र कैद की सजा सुनाई गई…27 बरस तक मंडेला जेल में रहे,लेकिन अपने अधिकारों की लड़ाई इन्होंने जेल में भी जारी रखी और इनसे जेल में कोयला खनिक का काम लिया गया ।मंडेला की विचारधारा अनुसार “मुसीबतें किसी को तोड़ती हैं तो किसी को मजबूत भी बनाती हैं. कोई भी कुल्हाड़ी इतनी तेज नहीं होती कि वो लगातार प्रयास करने वाले के हौसले को तोड़ सके “…अंततः गोरी सरकार ने 11 फरवरी 1990 को मंडेला को जेल से रिहा कर दिया और 1994 को मंडेला की पार्टी को दक्षिणी अफ्रीका के आम चुनावों में 62 प्रतिशत वोट मिले…अगस्त 1994 को नेल्सन मंडेला दक्षिणी अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने और उन्होंने 75000 घरों का निर्माण किया..20 लाख लोगों को बिजली की सुविधा मुहैया करवाई और 30 लाख लोगों के लिए पीने वाले पानी का उत्तम प्रबन्ध किया ।उन्होंने गरीब और दबी कुचली काली अफ्रीकी जाति का उद्धार किया …,वर्ष 1997 को उन्होंने राजनीति से सन्यास ले लिया और नेल्सन मंडेला ने केवल एक अमरीका को छोड़कर सारी धरती के देशों में सम्मान पाया ।मंडेला को वर्ष 1993 को नोबेल शांति पुरस्कार मिला ,भारत का सर्वउच्च सम्मान भारत रत्न ,पाकिस्तान का सर्वउच्च सम्मान इम्तियाज़ ऐ पाकिस्तान और सन 2008 को गांधी शांति पुरस्कार मिला…कुल मिलाकर मंडेला वो शख्सियत रहे जिन्होंने धरती के तमाम देशो से लगभग 250 सम्मान हांसिल किये और दुनिया की लगभग 50 यूनिवरसिटीओं ने उन्हें डॉक्टरेट की डिग्री से नवाजा ।…अगर निजी जिंदगी की बात करें तो मंडेला की 3 बीवियां थी ।पहली इवलिन दूसरी विनी और तीसरी ग्रेस मेकल थी । इनके कुल 9 बच्चे और 17 पोते पोतियां थी ।संयुक्त राष्ट्र संघ ने मंडेला के किये गए महान कार्यों को मद्देनजर रखते हुए उनके जन्मदिवस यानी कि 18 जुलाई को “मंडेला दिवस” घोषित किया है ।मुझे मंडेला के बारे में यह तुच्छ सी जानकारी प्राप्त करते हुए जो सबसे खास बात उनकी लगी वो थी….
1 . मंडेला निजी जिंदगी में हंसमुख इंसान थे और अपनी 27 साल की लंबी जेल यात्रा के बारे में उन्होंने अति सहजता से कहा कि “मैं 27 साल की छुट्टी पर गया था ।
2 .मंडेला में इतनी ऊर्जा और तेज था कि उससे डरते हुए गोरी अफ्रीकी सरकार ने आम जनता से इनकी बातचीत ही बंद करवा दी ।
3 .वो लोग जिन्होंने इन्हें 27 साल के नरक में रखा ,सभी शक्तियां पाकर भी इन्होंने उनसे बदलाखोरी की भावना से व्यवहार नही किया बल्कि उन्हें यथासम्भव सम्मान दिया ।
5 . मंडेला ने 80 साल की उम्र में 3रा विवाह करवाया ,जो कि उनकी ज़िंदादिली का खास नमूना है ।
6. मंडेला ने राजनीति से सन्यास लेकर अपने सभी अज़ीज़ और दुनिया भर के मित्रों से कहा कि आप मुझे फ़ोन मत कीजियेगा ,जब मेरा दिल करेगा मै खुद आपको काल करूँगा ।ऐसा इसलिये क्योंकि वह अपना समय अपने परिवार को देना चाहते थे ।
अंततः 5 दिसंबर 2013 को नेल्सन मंडेला फेफड़ो की बीमारी से लड़ते हुए 95 साल की उम्र में दुनिया से चल बसे ।
मंडेला उच्चकोटि के अहिंसावादी हुए हैं और गांधी जी से बेहद प्रभावित रहे है ।
उम्मीद है इस महान विभूति का छोटा सा जीवन प्रसंग आपके ज्ञान में वृद्धि करेगा ।

 

राजकुमार ‘राज’
शिक्षक,अमृतसर।
मो–9592968886

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