पीला आकाश—(भाग-2)

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पीला आकाश—(भाग-2)

पिता जंगल में पहुंचा उसे दूर से ही खानों की खुशबू और संगीत की मधुर धुनें अपनी ओर खींचने लगी । पिता हैरान सा जादुई घर के सामने पहुंचा । पिता ने दरवाज़ा खटखटाया । अंदर से अत्यंत सुंदर दो युवतियाँ बाहर आईं । दोनों ने पिता को पहचान लिया ।इतने सालों बाद पिता ने जब बेटियों को देखा तो हतप्रभ रह गया । दोनों जीवित थी और पहले से बहुत तंदरुस्त और अच्छी दिख रही थीं।पिता ने सर झुका लिया मानो वो दोनों बेटियों का सामना नहीं कर पा रहा था । दोनों बेटियां भाग कर पिता से लिपट गई जैसे कोई खोया धन प्राप्त हो गया हो। दोनों रोती जाती और पिता को सब बताती जाती। पिता ने माफी मांगी । दोनों बहनें बोली,”नहीं पिता जी,इसमें आपका कोई दोष नहीं था”
दोनों बेटियों ने पिता की खूब सेवा की । ऐसे ऐसे पकवान खिलाए जो कभी किसी ने देखे सुने और खाए न थे। एक महीने तक दोनों बहनों ने जी जान से पिता की सेवा की।
एक महीने में हर रोज़ दोनों बहनें एक काम ज़रूर करती। सुबह और शाम हर रोज़ जंगल में जाती एक जादुई खाली मटका लेकर ।

जंगल में जाकर दोनों जगह जगह घूमती। जो भी ज़हरीला साँप बिच्छु ततैया कीड़ा मकौड़ा उन्हें मिलता उसे जादू के मटके में डालती जाती। जादू के मटके का जादू था कि उसमें कोई भी जीवित चीज़ मरती नहीं थी चाहे सालों साल मटका बंद रखा जाए।
एक महीने तक बेटियों के पास रहने के बाद पिता ने घर जाने की इच्छा जताई । दोनों बहनें उदास हो गईं। बोलीं ‘ पिता जी ये आपका ही घर है जब मन चाहे आ जाना। आप हमेशा हमारे पास रहो हम यही चाहती हैं । ‘
पिता ने मन ही मन अपनी पुत्रियों को बहुत आशीर्वाद दिया । पिता ने जाने की तैयारी की ।दोनों बहनें पिता से कहने लगी ‘ पिता जी हमने आपकी सेवा करके बहुत खुशी प्राप्त की अब हम अपनी मां के लिए भी अच्छे अच्छे पकवान भेजना चाहती हैं । ये मटका आप मां के लिए ले जाओ इसमें बहुत स्वादिष्ट कभी न खराब होने वाले छत्तीस प्रकार के पकवान रखे हैं । इसे आप मार्ग में न खोलना वर्ना इन्हें हवा लग जाएगी और ये खराब हो सकते हैं। आपको हमारी कसम आप ये माँ को ही सौंपना और उन्हें कमरे में छुप कर खाने को कहना। जब वो खाने लगे आप कमरे की बाहर से कुंडी लगा देना ताकि लोगों को खुशबू न पहुंच पाए।’
पिता घर पहुंचा ।सौतेली माँ ने कड़क कर पूछा कहाँ रहे इतने दिन। पिता ने कहा कि वो एक राजा के यहाँ नौकरी करने गया था और वहाँ शहर के बाज़ार से उसके लिए बहुत स्वादिष्ट मिठाई लेकर आया है जिसे वो अंदर जाकर छुप कर खा ले।
सौतेली माँ थी चटोरी। मिठाई के नाम से उसके मुँह में पानी आ गया ।बोली जल्दी दो मिठाई । मटका लेकर भाग कर कमरे में चली गई। बेटियों ने जैसे कहा था पिता ने बाहर से कुंडी लगा दी और खुद आराम से आंगन में पड़ी चारपाई पर लेट गया ।
सौतेली माँ के हाथों में वही जादुई मटका था जो दोनों बहनें एक महीने तक ज़हरीले साँप बिच्छु ततैया कीड़े-मकौड़ों से भरती रही थीं।सौतेली माँ ने जैसे ही मिठाई खाने के लिए मटका खोला ऐसा लगा कि तूफान आ गया । बहुत सारे ज़हरीले साँप बिच्छु ततैये इधर उधर भागने लगे और सौतेली माँ को यहाँ वहाँ काटने लगे । वो ज़ोर से चिल्लाने लगी,” हाए! हाए !!खा लिया !!खा लिया !! पिता आराम से लेटे बोल रहा था ” अब तुम खाओ , मैं तो खूब खा कर आया हूँ । खाओ खाओ तुम ।” सौतेली माँ फिर चिल्लाई ” हाय! हाय! खा लिया! ! खा लिया! ! पिता आराम से लेटे लेटे फिर बोला ” तुम पेट भर कर खाओ, मैं तो खूब खा कर आया हूँ ।”
फिर तो खा लिया खा लिया की आवाज़ें आनी भी बंद हो गई । साँप बिच्छु अपना काम करके फिर से मटके में छुप गए और मटका अपने आप बंद हो गया।
थका हारा पिता आँगन में ही सो गया जब काफी देर बाद उसकी आँख खुली उसने कमरे का दरवाज़ा खोला तो सौतेली माँ अपने कर्मों का फल भुगत कर मरी पड़ी थी।
पिता ने अपना सामान उठाया और हमेशा के लिए अपनी बेटियों के पास रहने चला गया ।

समाप्त !!

नवीन किरण ,अध्यापिका
मो—7696157281, करतारपुर,जालंधर

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