पीला आकाश (भाग-1)

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पीला आकाश –(भाग–1)

       (बाल कहानी)

बहुत ही पुरानी बात है ।एक गांव में दो बहनें थीं । छोटी सी प्यारी सी। आपस में दोनों का बहुत प्यार था। बीमार मां बिस्तर पर पड़ी दोनों को दूर से निहारती । पास बुला कर जीवन का पाठ पढ़ाती ।दोनों बहनें माँ की बातें हभेशा याद रखने का वादा करती।एक दिन माँ बीमारी से चल बसी।निर्दयी पिता ने झट दूसरी शादी कर ली। सौतेली माँ को दोनों लडकियां फूटी आँख न सुहाती।
एक दिन सौतेली माँ ने लड़कियों के पिता से कहा कि मैं तब जीवित रहती हूँ ।जब आप इन दोनों बहनों को दूर कहीं जंगल में छोड़ आओ।पहली पत्नी की मृत्यु से डरा पति मान गया कि ठीक है, छोड़ आता हूँ ।
पिता ने बेटियों से कहा ,चलो तैयार हो जाओ ,मामा से मिलके आते हैं ।बच्चियां खुशी-खुशी तैयार हो गईं । किसी घने जंगल में ले जा कर पिता ने कहा कि मैं अभी आता हूँ, तुम लोग यहाँ बैठो ।
लड़कियाँ शाम तक इंतज़ार करती रहीं, पिता ने नहीं आना था वो न आया। लड़कियों ने देखा पास ही एक घर है अजीब सा।वो दोनों वहां गईं।
शाम का पीला आकाश पक्षियों से भर गया ।उनके टूट कर बिखरते पंख किसी अनहोनी की आशंका जता रहे थे। दोनों बहनें डर गई।तभी आवाज़ आई एक डरावनी जादूगरनी की।

डरावनी जादूगरनी जादू के कालीन पर सवार हो कर उड़ती आ रही थी। उसकी भयानक हंसी दूर से सुनाई दे रही थी दोनों बहनों ने घर में खुद को फंसा हुआ महसूस किया।पर वो डरी नहीं दोनों बहुत बहादुर थीं ।कठिन जीवन जीते जीते दोनों मजबूत बन चुकी थीं । बड़ी बहन ने आसपास देखा एक मसाला कूटने वाला मूसल रखा था और एक पत्थर का सिलबट्टा। बड़ी बहन ने सिलबट्टा उठाया छोटी ने मूसल। दरवाज़े के दोनों ओर छुप गई।जादूगरनी बिना खतरा भांपे घर में घुसी।दोनों बहनों ने ताबड़तोड़ वार करके खूंखार जादूगरनी को धराशायी कर दिया। जादूगरनी के मरते ही सैंकड़ों पक्षी खुशी से गाने लगे। कितने ही राही जो जादूगरनी के जादुई घर में कैद थे स्वतः ही आज़ाद हो गए।मटकों में बंद कितने प्यारे जीव खरगोश,तितलियाँ,कछुए,रंग बिरंगे पक्षी सब निकल निकल भागने और उड़ने लगे।पूरे जंगल में उत्सव का माहौल था। सब दोनों बहनों को धन्यवाद दे रहे थे।जादूगरनी के अत्याचारों का अंत करने के लिए मानो ईश्वर ने दोनों बहनों को भेजा था ।
अब क्या था जादूगरनी का अजीब सा घर दोनों बहनों का हो चुका था । घर में एक से बढ़ कर एक जादू की चीज़ें थीं ।एक चक्की थी जो खुद ही आटा निकालती जाती। एक मटका दूध से भरा जिसमें दूध खत्म ही नहीं होता। एक तिजोरी जिसमें हीरे जवाहरात । एक उड़ता कालीन ।फलों से लदे पेड़ जिनसे दोनों बहनें फल तोड़ती जाती उन पर और फल लगते जाते।
दोनों बहनें जंगल में आराम से रहने लगी ,कितने साल बीत गए। उधर सौतेली माँ के यहाँ कोई औलाद न हुई । पिता को पुत्रियों की याद हमेशा सताती ।एक दिन पिता ने सोचा क्यों न एक बार जंगल में जाकर देखूं कि मेरी बेटियां किस हाल में हैं । क्या पता दोनों ज़िन्दा हों।

Continue……


नवीन किरण ,अध्यापिका
मो—7696157281, करतारपुर,जालंधर

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6 COMMENTS

  1. मजेदार एवं कौतूहल पैदा करती कहानी बच्चों को भीतर कहानी सुनने एवं कहने की भावना पैदा करती है…बधाई नवीन जी

  2. कल्पना के माध्यम हे( एक अब क्या होगा) भाव को लेकर एक सुंदर संदेश देकर जाने वाली कहानी होगी।मन का डर और उसका समाधान लाजवाब।
    आगे समय समय पर हम औऋ भी कहते रहेगे बधाई क्रमश:….

  3. जिस बच्चे को सुनाएगें उसके विचार आपको भेजेगें

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