बूँदें बोलेंगी

0
115

बूँदें बोलेंगी

आवरण गिरा जो बादलों का बूँदें बोलेंगी ।
चांदनी की डोरियों से भू को छू लेंगी ।।
तनु संग आत्मा की वारूणी भिगो देंगी ।
वारिधि में प्रीत की हर प्राण को डुबो देंगी ।।
धरा हरा वासन ले ओढ़े बादलों को ज्ञान है ।
प्रेम में होता है त्याग प्रत्यक्ष ये प्रमाण है ।।
निखरी संवरी ये धरा ही अब गगन का मान है ।
इस मान का ही ध्यान तो अनुराग की पहचान है ।।
कर्ण कर रहे श्रवण वरण आज गीतों का ।
ईश की शरण में सोया सूर्य ताप किरणों का ।।
भोर में विभोर आँखें क्यारी क्यारी देखेंगी।
कण-कण वसुधा का वह बारी -बारी देखेंगी ।।

सीमा चन्द्रिका तिवारी
जन्मतिथि —10 जनवरी
शिक्षा— एम.ए , बीएड, PGDTE
लेखन विधा –गीत , गजल , छंदमुक्त
सम्प्रति — अंग्रेजी शिक्षिका
रूचि — संगीत , साहित्य
पता — रांची ( झारखण्ड )
Loading...
SHARE
Previous articleसावन की मनुहार
Next articleसमकालीन कवयित्री डाॅ. पूर्णिमा राय के काव्य-संग्रह ‘ओस की बूॅंदें: बहुआयामी अवलोकन(डाॅ. हरिभजन प्रियदर्शी)
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here