फूल भी तो चाहिये(गज़ल)

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फूल भी तो चाहिये 

फूल भी तो चाहियें माला बनाने के लिये!
ख़ार ही काफी नहीँ गुलशन सजाने के लिये!!
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देख करनी आदमी की आज रब शरमा गया!
हर करम करता बशर है धन कमाने के लिये!!
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साथ कुछ जाना नहीँ है ये उसे मालूम पर!
फिर भी’सपने है सजाता स्वर्ग पाने के लिये!!
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कर्म उजले संग रहते बात वेदों ने कही!
पाप की गठरी भरे क्यों दिल लुभाने के लिये!!
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कुरबतें अब हो गयी हैं फासले भी मिट गये!
दीप सब रोशन हुए रस्ता दिखाने के लिये!!
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धर्मेन्द्र अरोड़ा “मुसाफ़िर”
संपर्क:मकान न;1539,न्यू हाऊसिंग बोर्ड कालोनी,पानीपत
(हरियाणा)

ईमेल: dharmenderarora.
rajyogi@gmail.com
9034376051

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