पहला सावन

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पहला सावन

शादी के बाद वो पहला सावन आया था
चंचल मन हुआ था बावरा खूब यौवन छाया था
एक तरफ थी पिया मिलन की खुशी
तो दूजी तरफ मन मात-पिता और पीहर में समाया था।

कितने रीत कितने रिवाज
नई नवेली थी दुल्हन मन बहुत सकुचाया था
पिया ढूँँढ़ते थे बहाना बार-बार मिलने के
मन उनकी इस अदा पर खूब मुस्काया था।

सोच रही थी दौड़ जाऊँगी                                                        हर रीत निभाकर पीहर में
पर सामने रोड़ा बनकर सावन आया था
पर जहाँ थी बिछड़ने की वेदना                                              वही थी लबरेज खुशी कि                                     शादी के बाद पी के संग पहला सावन झूम के आया था।

रुबी प्रसाद,सिलीगुड़ी,पश्चिम बंगाल

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