पुरवा सुहानी चले by Dr.Purnima Rai

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पुरवा सुहानी चले बागों में बहार खिले
सावन के झूले पडे प्रेम गीत गाइये।।
सोलह श्रृंगार करे मांग में सिंदूर भरें
हंस-हंस बातें करें रोते को हंसाइये।।
तीज का त्योहार आया खुशियों को साथ लाया।
नफरत भावना को दिल से भगाइये।।
साजन के नाम लिखे मेंहदी के रंग सजे
दूर-दूर जाये कहीं रूठे तो मनाइये।।
डॉ.पूर्णिमा राय,अमृतसर
drpurnima01.dpr@gmail.com
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