सावन आया

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 सावन आया   (पादाकुलक छ़ंद)

आंगन आंगन ,सावन आया
गीत प्रणय का,सबने गाया
भोले शंकर की है पूजा
नहीं जहाँ में कोई दूजा

हर मन ध्यावे,लेकर आशा
पूर्ण मनोरथ,न हो निराशा
दूध दही मिल,पूजा करते
खुशियाँ झोली में फिर भरते

झूम रही है गोरी मैया
नाच रहीं सँग देखो गैया
नंदीगण सँग,भेरू आये
हमने सावन गीत सुनाए

मन के अंदर ,प्रीत जगी है
भोले से ही आस लगी है
भोले सबकी ,झोली भरते
दुख सबके ही ,शिव जी हरते

कैलाश सोनी सार्थक (हास्य व्यंग्य गीतकार)  नागदा(उज्जैन )मोबाईल-8959794982 ,7987409287

 

 

 

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