हिन्दी मुहावरे का प्रयोग कहानी के रूप में____

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हिन्दी मुहावरे का प्रयोग कहानी के रूप में____डॉ.पूर्णिमा राय

माँ की आँख का तारा आँखें दिखाकर अपना उल्लू सीधा करके  आँखें चुराकर  नौ दो ग्यारह हो गया
पुत्र की बाट जोहती माँ का कलेजा मुँह को आने लगा। माँ पर दुखों का पहाड़ टूट पडा।उसके जिगर के टुकड़े- टुकड़े हो गये।व्यथित हुयी माँ का गला भारी हो गया। यह सब देख पिता का मन भर आया।पिता ने साहस दिखाया।उन्होंने हिम्मत ना हारी ।दोनों ने एकजुट होकर कमर कसकर कंधे से कंधा मिलाकर बुरी संगति में पड़े पुत्र को शत्रुओं के छक्के छुड़ाकर वापिस लाने हेतु दृढ़ प्रतिज्ञा की।

माता-पिता से दूर रहकर पुत्र को अपनी गल्ती का एहसास हुआ।वह पश्चाताप की अग्नि में जलने लगा।माता-पिता को प्रणाम करके उसने सौगन्ध खाई कि वह घर का भेदी लंका ढाये वाला पात्र नही बनेगा।क्षमा याचना करके माता-पिता के चरण छूकर उसने आजीवन साथ रहने तथा सेवा धर्म निभाने की शपथ ली।

सभी फूले नहीं समा रहे थे।हंसी खुशी में दिन बिता रहे थे।चादर के बाहर पैर भी नहीं पसार रहे थे।अचानक ईंट से ईंट बजने लगी ।गमों के बादल छा गये।मुश्किलों नें चारों ओर से उन्हें घेर लिया।सर्वत्र मातम छा गया। जीवनपर्यन्त कष्ट झेलते माता-पिता नजरों से ओझल हो गये।चिरनिद्रा में सो गये।

चाहे आज के कलियुगी प्रभाव से पुत्र का रक्त सफेद हो चुका था।लेकिन स्वर्ग सिधार चुके माता-पिता की शिक्षा उसे रह-रह कर याद आती थी जो उसकी राह के कांटो को चुनकर लक्ष्य सिद्धि में पथ-प्रदर्शक का प्रशंसनीय कार्य कर रही थी।

डॉ०पूर्णिमा राय,अमृतसर।

drpurnima01.dpr@gmail.com

 

 

   

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