है भोर सुहानी: वर्ण (पिरामिड)

ये 
नैना
चंचल
भरमाये
काया बेसुध
भरी जवानी में
बनी मीरां दीवानी

है 
कृपा
प्रभु की
असीमित
बेशुमार ये
मिलती खुशियां 
रहे बेचैन मन!!

ये 
तन
पावन
चितचोर
मनभावन 
कृष्ण सांवरिया
ढूँढती हैं निगाहें!!

हे
गुरु
नमन
करो तुम
कष्ट शमन
बने पहचान
विश्व की थाती पर!!

हैं
घूमें
पुराने
वस्त्र तन
सजल नैन
रोटी की भाल में
बच्चे कुत्तों की भाँति!!

माँ
सूना
आंगन
तेरे बिन
महकती
नहीं अब फिजा
कौन पोंछेंगा आँसू!!


पास
भर लूं
आगोश में
सिमटी सांसें
ज्यों बादलों की
ओट में छिपा चाँद!!

है
लाडो
बिटिया
लक्ष्मी जैसी
उडेल देती
खुशियां अपनी
बचाओ कन्या भ्रूण!!

है 
भोर 
सुहानी
जागो प्रिय
सूर्य लालिमा
उज्ज्वल धवल
मुख मंडल फैले!!

Dr.Purnima Rai, Asr

 

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