तुम बिन सावन बीते by Dr.Purnima Rai

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तुम बिन सावन बीते ( माहिया) by Dr Purnima Rai

      1)                        

 हम तेरे कायल हैं
साजन आ जाना
घिर आये बादल हैं

2)
बादल घिर आये हैं
यादों की गठरी
भर-भर कर लाये हैं

3)
यह दिल है दीवाना
राह तके नैना
मौसम भी मस्ताना

4)
तुम दूर करो गम को
हँसना जीवन है
खत लिख देना हमको

5)
खिड़की से झाँक रहा
निर्मोही चंदा
बरबस ही ताक रहा।।

6)
टिप-टिप पानी बरसे
रूठ गये हो तुम
प्रेमी मन ये तरसे।।

7)
लगता न मोरा जिया
गिन -गिन तारे भी
कटती ना रात पिया।।

8)
गुलशन में फूल खिले
सुरभित मन्द हवा
चाहत में हृदय मिले।।

9)
झरने की ये कलकल
मीठे सपनों की
याद दिलाए पल पल।।

10)
तुम भूल गये बातें
कसमें याद नहीं
बीते कैसे रातें।।

11)
तुम बिन सावन बीते
आना बारिश बन
हम हारे तुम जीते।।

डॉ.पूर्णिमा राय,अमृतसर
drpurnima01.dpr@gmail .com

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3 COMMENTS

  1. सावन के माह व बरसात के मौसम के मीठे माहिया । सभी माहिया एक से बढ़ के एक हैं । बधाई लें ।

    • आभार आ.विभा जी…आपकी प्रतिक्रिया सदैव प्रेरित करती है।आपका साहित्य प्रेम देखकर अतीव प्रसन्नता होती है…..

  2. वाह वाह लाजवाब
    एक एक कर के सारे पढ गये हम।
    साजन की यादों में खो गये हम।
    कमाल का लिखा

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