वीर एवं वीरांगनाएं (विशेषांक, जुलाई 2017) – गीतिका

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१* सुनीता काम्बोज
जन्मतिथि-10 अगस्त
करनाल  (हरियाणा) भारत
विधा– ग़ज़ल , छंद ,गीत,हाइकु ,बाल गीत ,भजन  एवं हरियाणवी भाषा में ग़ज़ल व गीत ।
शिक्षा –हिन्दी और इतिहास में परास्नातक ।
ईमेल –Sunitakamboj31@gmail.com
 
        कभी नहीं बिसरायेंगे
ये बलिदान त्याग की गाथा कभी नहीं बिसराएँगे
रानी का अनमोल समर्पण युगों- युगों तक गाएँगे।।
मोरोपन्त घराने जन्मी रण कौशल की बड़ी धनी
नाम छबीली लक्ष्मीबाई झाँसी की कुलवधू बनी ।।
नहीं खिलौनें उसको भाए तलवारों से खेली थी
बरछी और कटारी देखो उसकी सखी सहेली थी।।
बलवंती गुणवंती रानी रग-रग में खुद्दारी थी
झाँसी की रानी को झाँसी प्राणों से भी प्यारी थी।।
पराधीनता हरगिज भी थी रानी को स्वीकार नहीं
जीते जी दुश्मन के आगे मानी उसने हार नहीं।।
नहीं फिरंगी इस झाँसी का राजतख्त छू पाएगा
हिम्मत है तो पहले मुझसे रण में लड़ने आएगा ।।
चली शेरनी गरजी रण में दुश्मन को ललकार दिया
दुर्गा रणचंडी  ज्वाला का जैसे हो अवतार लिया।।
लपटें उठी यज्ञ की भड़की इंकलाब के स्वर गूँजे
आजादी की उठी हिलोरें ये धरती अम्बर गूँजे ।।
पुत्र पीठ से बाँध लिया है दो हाथों में तलवारें
सर काटे धरती पर डाले लाल रक्त बहती धारें।।
दुश्मन दंग हुआ बल देखा मन ही मन भयभीत बड़ा
काल नाचता जैसे रण में  मुँह खोला जड़वत् खड़ा ।।
अंतिम श्वास भरी रानी ने धरती छू वंदन करती
काया नश्वर मर जाती है पर उम्मीद नहीं मरती।।
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    २* प्रमोद सनाढ्य”प्रमोद”
सत्यम् गोकुल नगर, आर टी दी सी रोड, लालबाग’ नाथद्वारा,जिला- राजसमंद(राज.)
मो—- 919414232515
 
       एक सैनिक की ख्वाहिश
 
होठों पे हंसी चेहरे पे चमक, फूलो सी मुस्कान है,
दिल में मेरे श्री मद् गीता, बाइबल और कुरान है।।
समरसता का मै हूँ पुजारी ,सर्व धर्म सम्मान है,
 लब पर मेरे सबसे पहले प्यारा हिंदुस्तान है  ।।
मन करता बन जाऊं तिरंगा ,लाल किले पर लहराऊँ,
या फूलों का पुष्पचक्र बन वीर शहादत चढ़ जाऊँ।।
दिल में एक तमन्ना है ,काम कोई यूँ कर जाऊं,
जब दुनिया से रुखसत पाऊँ,मैं शहीद ही कहलाऊँ।।
तीन रंग का कफ़न हो मेरा,सिर पर केसरिया  बाना,
मेरी अंत विदाई पर तुम ,”वन्देमातरम्”गीत सुनाना।।
धूम से निकले  मेरा जनाजा,आन बान और शान से
 जन्नत में भी चर्चें हो ,कोई आया “हिंदुस्तान” से
मेरी चिता प्रज्वल्लित करने अमर ज्योत ज्वाला लाना,
प्रवाह करो जब अस्थि कलश, तो जनगणमन धुन बजवाना।।
मेरी हर बरसी पर केवल ,सैनिक सम्मान करा देना,
या शहीद की बेटी का तुम, “कन्या दान”करा देना ।।
श्राद्ध पे मेरे इतना करना,स्कूल एक  बना देना,
राष्ट्रभक्ति का बच्चों को फिर,पहला पाठ पढ़ा  देना।।   शपथ है मुझको भारत माँ की,सीने पर गोली खाऊंगा,
मरने से पहले दुश्मन की,सौ-सौ लाश बिछाऊँगा  ।।
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३* सुखदेव राज क्यामपुरियन
स्नातक हिन्दी शिक्षक
आवास स्थान: 148, साहिबजादा जुझार सिंह ऐविन्यू, फेज 2, एयरपोर्ट रोड, अमृतसर,पंजाब।
पिन संख्या: 143008
सम्पर्क: 92164-08748
सोने की चिड़िया
थी प्रीत जहाँ की रीत सदा चलो
उसका हाल सुनाता हूँ
सोने की चिड़िया का देखो
 चलो वर्तमान बतलाता हूँ।
जनतंत्र के नाम पर हो रही
पग-पग यूँ कुछ खुशहाली है।
कृषकों के हिस्से में गोली
कुर्सी मनाए  ईद दीवाली है।
जहाँ धर्म वसन की हो जाती
क्षण भर में पाती पाती है।
गौ मात रही जो पूजनीया
सरेआम काट दी जाती है।
 हो रही भारतीय भूमि पर
कैसी यह एकता धार्मिक है।
मंदिर में भगवन मस्जिद में अल्लाह
अयोध्या का किस्सा मार्मिक है
अनुपम साहित्य सृजन की धारा
बहती थी विभिन्न सोपानो से।
संस्कृत की बेटी, लगे ज्यों रूठी
वैकल्पिक कुछ उपमानों से।
गुरूकुलों का भी अब क्या जानें
कैसा यह दौर निराला है।
गृह बैठा शिष्य अब होत उतीर्ण
कैसी शिक्षा यह आला है।
सुसंस्कृत एवं सौम्य सा
उस दौर में भारतवासी था
कुदृष्टि रखे जो पर स्त्री पर
नाहि ऐसा सत्यानाशी था।
लौटे फिर बीता परिवेश पुन:
उर में पीर ज्यों जंग घमासान है।
और नहीं शेष कुछ कर यत्न
बचा ले देश अब लेखनी कमान है
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 ४* प्रमोद सनाढ्य”प्रमोद
“सत्यम्”गोकुल नगर, आर टी दी सी रोड, लालबाग’ नाथद्वारा,जिला- राजसमंद(राज.)
मो—- 919414232515
 
धरती की महानता
शीश झुकाकर नमन करूं मैं
इस माटी को वंदन है।
राणा प्रताप की रण भूमि
हल्दी घाटी अभिनन्दन है।
अभिनन्दन मेवाड़ धरा
 वीरों की धरती वंदन है।
इस माटी का तिलक लगाऊं
इसका रज रज कण चन्दन है।
चेतक की  कुर्बान  धरा,
पूंजा की अमर कहानी है।
तंवर वीर सेनानी  की
ये बचपन और जवानी है।
(यहाँ वीर तंवर की तीन पीढ़ी ने एक साथ युद्ध किया था)
इस के आँगन की रक्त तलाई,
वीरों की  गाथा गाती  है
चैत्री गुलाब  फूलों की खुशबू
 घाटी  को  महकती  है।
इस माटी में जन्म लिया मैंने
इस पर मुझ को अभिमान है।
ये मेवाड़ के गौरव वाली
मिट्टी बड़ी महान है।
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