वीर एवं वीरांगनाएं (विशेषांक, जुलाई 2017) – तांंटक छंद

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१* आशीष पाण्डेय ज़िद्दी
शाहनगर, पन्ना मध्यप्रदेश
मो….९८२६२७८८३७
 
        शीश गर्व से ऊँचा
 
आज हमारी माताओं का,शीश गर्व से ऊँचा है।
एक हुए सब भाई-भाई,निर्भय हिन्द समूचा है।
हिन्द की धरती पावन इतनी,जितनी गंगा धारा है।
एक तिरंगा अम्बर में है,लहराता वो प्यारा है।
खून बहा सरहद पर इतना,कितनी कोखें रोई हैं।
कितनी बहनों ने सीमा पर,अपनी राखी खोई हैं।
माथे का टीका भी धोया,हाथ की  मेहँदी धोई हैं।
नई-नवेली दुलहन ने भी,अपनी खुशियाँ खोई हैं।
हम बैठे हैं आज घरों में,सैनिक सरहद जाते हैं।
बम गिरते हैं गोली चलती,सीने पर वो खाते हैं।
उनके घर में मातम छाया,अपने घर दीवाली है।
भारत माता की झोली ये,नही वीर से खाली है।
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1 COMMENT

  1. धन्यवाद दीदी।आपका यह कार्य अनुपम एयर अनमोल है हमारे लिए

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