वीर एवं वीरांगनाएं (विशेषांक, जुलाई 2017) – राधेश्यामी छंद

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१* प्रवीण त्रिपाठी
 उन्नाव, उत्तर प्रदेश
ईमेल–pst_5075@yahoo.com
मो—9001791890
 
          सीमा को आज बचाना है।
सरहद पर खड़े प्रहरियों को,अपना कर्तव्य निभाना है।
शत्रु की काली करतूतों से,सीमा को आज बचाना है।
जो करे कभी वह गुस्ताखी, यदि नज़रें टेढ़ी कर देखे।
उसकी भाषा में दे जवाब, उसको ही धूल चटाना है।
हम करें नहीं कुछ कोताही, अपना कर्तव्य  निभाएंगे।
न्योछावर कर दें जीवन को, रक्षा हित शीश कटाना है।
बर्फ गिरे याँ आंधी आये, हम डिगते नहीं हैं निश्चय से।
रेगिस्तानी तपती भू पर, बिन नागा गश्त लगाना है।
बलिदान करेंगे हम जीवन,आये जब कोई विकट घड़ी
खायी थी हमने कुछ कसमें,उनको हर हाल निभाना है।
सम्मान तिरंगे का करते, है बढ़े शान अपनी जिससे।
जो पहनी है रक्षा खातिर, वर्दी का कर्ज चुकाना है।
कहीं छुपा हो यदि अब दुश्मन, उसको हम ढूँढ़ निकालेंगे।
नहीं कभी छोड़ेंगे पीछा,इतना मन में बस ठाना है।
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