वीर एवं वीरांगनाएं (विशेषांक, जुलाई 2017) – आल्हा छंद

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1*आभा सिंह
विधा- कहानी, कविता ,लघुकथा
मो- 088290-59234
         वीर  कैप्टेन सुनीत बार्नी
(जन्म-10अगस्त 1969 ,मृत्यु-9 अप्रैल 1995
यूनिट-16 सिख लाइ रेजीमेंट)
भारत माँ का अनमोल रत्न, कैप्टेन सुनीत था नाम।
सोलह सिख लाइट सेना का, होनहार अफ़सर उद्दाम।
पाकिस्तान बना था जंगी,मकड़ जकड़  का फैला जाल।
रोज़ रोज़ की गोला बारी,यह थी उसकी कपटी चाल।
अप्रैल आठ पिच्चानवे को,शुरू हुआ शत्रु का त्रास।
हम्प पोस्ट पर वह तैनात,कश्मीरी सीमा के पास।
आतंकवाद की सरगर्मी ,प्राण घातक दुश्मन प्रहार।
सारे जवान जूझ रहे थे,करते रहे वार पर वार।
दोनों ओर आग का रौला,मच रहा तांडव संगीन।
घिरे हुये थे फिर भी बाँके,साध निशाने हो तल्लीन।
बंकर बाहर निकला अफ़सर,लेकर हाथों में हथियार,
नहीं ज़रा भी अपनी चिंता,चलती गोलों की बौछार,
काल बना इक गोला आया,बिखरे छर्रे चारों ओर,
लगा जाँघ में छर्रा उसके,पीड़ा आग बनी घनघोर।
लहू लहू सब ओर हुआ था,वह था विकल शेर जाँबाज़ ,
नहीं हौंसला हारा उसने,मृत्यु बना शत्रु की आज।
ख़ून बह रहा झलझल करके,ढेर पगड़ियाँ  भर दीं ठूँस,
सहायता पाना मुश्किल था,गोला बारी थी मनहूस।
मरते दम तक रहा मनोबल,दाँव पर दाँव किया कमाल।
देश धरा का क़र्ज़ चुका कर,बंकर बाहर सोया लाल।
देश ने भी किया सम्मानित,वीर चक्र से सज गया लाल।
ऐसी साहस की गाथाएँ , करें देश का उन्नत भाल।
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२* शोभित तिवारी “शोभित
लखीमपुर खीरी धौरहरा
मोबाईल –7800961090
 
आल्हा छंद——बटुकेश्वर दत्त
( नवंबर1907-19 जुलाई1965)
आजादी का जो मतवाला ,बना वीरता की पहचान।
भूल गयी थी क्यों सरकारें ,बटुकेश्वर जी का बलिदान
इनके एक धमाके से ही,जिंदा है ये हिन्दुस्तान।।
फिर क्यों इनको मिला नहीं था,बोलो भारत में सम्मान।
बोलो क्यों ऐसे वीरों का,करवा पाये नहीं इलाज।
इस घटना को लेकर भारत ,की जनता शर्मिंदा आज।
देशभक्त वीरों का भारत ,मे मत होने दे अपमान।
ऐसी खबरें सुनकर कैसे,कह दें भारत देश महान।
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३* डॉ.पूर्णिमा राय
जन्म-तिथि–28दिसम्बर
योग्यता —   एम .ए , बी.एड, पीएच.डी (हिंदी)
वर्तमान पता–  ग्रीन एवनियू,घुमान रोड , तहसील बाबा बकाला , मेहता चौंक१४३११४,
अमृतसर(पंजाब)
 
               हिंद के लाल
 
वीर भगत सिंह ,उधम, शेखर ,
औ सराभा हिंद के लाल।
उनके जैसा जिगरा रखकर, 
करें देश का ऊँचा भाल।।
कर्म करें निष्काम भाव से ,
हिम्मत रखते हर पल वीर
मौत का ताँडव खेल अनोखा,
झुकता उनके आगे काल।
देश-प्रेम हित जीवन बीता,
कर दी जानें भी कुर्बान।    
खून की बूँदें रंग लायेंंगी,
रहा न हृदय कोई मलाल।।
लुधियाना का गाँव सराभा,
जगमग करता है करतार।  
 चिंगारी बन जाती ज्वाला,
दमित अमेरिका के सवाल।।
साढे उन्नीस अल्पायु में,
त्यागी उसने सुंदर देह।            
 गदर पार्टी का लोक नायक,
देश रंग में रंगा लाल।।
जात-धर्म ईमान हिन्द है,
भारत की सेवा अरमान।          
देश कौम की खातिर जीना,
मरना उनका अंतिम ख्याल।
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४* विभा रश्मि
बदायूँ, उत्तर प्रदेश
मोबाइल- 09414296536
           वीरो मत रुकना
बजी शिवालयों में घंटियाँ ,
गुंजित मानो धनु टंकार ।
           भुजाओं में फड़की मछलियाँ,
           सीनों में धधका अंगार ।
नौजवान वीरो मत रुकना ,
अरिबल दोधारी तलवार ।
            घमासान छिड़ता घाटी में ,
            दिखला दो अपनी फुंकार ।
विजय गान गाओ जोशीला  ,
ओज को ऊँचा , दो उछाल ।
            सतर्क हुए जुझारू गबरू  ,
             ठहर ! बिछा बैरी का जाल ।
जा फहरा  तिरंगा प्यारा ,
लगा देश -प्रेम का गुलाल ।
             घात लगा , दबोच बैरी को ,
             शिराएँ लहू रहीं उबाल ।
टूट पड़ीं , जहाँ आपदाएँ ,
दूत सा बन जा मददगार ।
ईद , क्रिसमस , होली -दिवाली ,
सिखा इंसानियत ,बन यार ।
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५* डॉ.पूर्णिमा राय
 
जन्म-तिथि–28दिसम्बर
योग्यता —   एम .ए , बी.एड, पीएच.डी (हिंदी)
वर्तमान पता–  ग्रीन एवनियू,घुमान रोड , तहसील बाबा बकाला , मेहता चौंक१४३११४,
अमृतसर(पंजाब)
 
                धाय  माँ पन्ना

धन्य समर्पण माँ पन्ना का,याद रखेगा यह संसार।
कुँवर उदय की रक्षा खातिर, दिया पुत्र चन्दन को वार।।

आस्तीन के साँप विषैले, फन फैलाये हुए तमाम।
पन्ना माँ के साहस आगे, भागे अपना लेकर चाम।।

माँ की बाँहों  में चंदन ने ,काटी थी अंधेरी रात।
पुत्र प्रेम भी जीत न पाया, मााँ पन्ना के मन जज्बात।

देश-प्रेम का फर्ज निभाया, राष्ट्र भले में करके त्याग।
विफल किया बनवीर चाल को ,कुँवर उदय के बदले भाग।।

दिल पर पत्थर रखकर उसने, सुनी पुत्र की अंत पुकार।
ममता की मूरत जननी ने, किया राष्ट्र से अनुपम प्यार।।

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