वीर एवं वीरांगनाएं (विशेषांक, जुलाई 2017) – गीत

0
175
१*अशोक गोयल पिलखुवा
 कवि, लेखक संपादक,समाज सेवी
संपर्क–
अशोक साड़ी भंडार ,उमराव सिंह मार्किट पिलखुवा (हापुड़),पिन 245304 यू०पी०
मो— 09457759878,  09259053955
          गीत—-वीरो का शृंगार
जीवन में मरण-त्योहार किसी दिन होता है,
वीरों  का   तो  शृंगार    उसी  दिन होता है।
  मधु- गंध बिछलते पंथ सभी को प्यारे हैं,
  मलयज  ने  जिनके  तीखे शूल बुहारे हैं,
  लेकिन जब पथ पर बिछ जाते अंगारे हैं,
झंझा  का  उग्र प्रहार  उसी  दिन होता है,
और खुला मृत्यु का द्वार उसी दिन होता है।
वीरोंं  का तो  शृंगार  उसी  दिन होता है।
 सब करते हैं  व्यापार  रजत की मेजों पर,
  सब के झुकते हैं शीश स्वर्ण-पाजेबों पर,
  सोना पड़ता है किंतु  कभी रण-सेजों पर,
सिर देने का व्यापार उसी दिन होता है,
बढ़-बढ़ कर असि का वार उसी दिन होता है।
वीरों  का  तो  शृंगार उसी दिन होता है।
जिसको भी देखो मोहन  है अपने मन में,
कसमसा  रही  हैं  राधाएँ आलिंगन  में,
लेकिन सुन टेर  किसी कान्हा के क्रंदन में,
 जग में जब हाहाकार उसी दिन होता है,
अर्जुन का रथ तैयार उसी दिन होता है।
वीरों   का तो शृंगार उसी  दिन होता है।
सब को प्राणों से प्यार सभी, जी लेते हैं,
ये स्वासों के पतवार, तरणि खे लेते हैं,
 लेकिन जब अत्याचार अधर सी देते हैं,
पशुता का प्रबल प्रहार उसी दिन होता है,
उसका भीषण प्रतिकार उसी दिन होता है।
वीरों  का तो शृंगार उसी दिन होता है।
माँ के मंदिर पर असुर कोई चढ़ आता हो,
प्रेयसि के आँचल पर जब हाथ बढ़ाता हो,
बहनों की कोरी लाज देख ललचाता हो,
प्रलयंकर का हुंकार उसी दिन होता है,
जीवित रहना धिक्कार उसी दिन होता है।
वीरों  का तो शृंगार उसी दिन होता है।
***************************************
२* डॉ०शिवजी श्रीवास्तव
-2,विवेक विहार मैनपुरी-205001
मो–9412069692
          जय बोलो
न मैं हिन्दू,न मैं मुस्लिम,न सिख न क्रिस्तान रे।
मजहब मेरा हिंदुस्तानी,तीरथ हिंदुस्तान रे।।
सुनो रे भाई, सुनो रे साथी,गाथा हिंदुस्तान की,
वीरों के बलिदान की,अपने मुल्क महान की।
आओ सब मिलकर जय बोलो,अपने हिंदुस्तान की,
भारत देश महान की—
जय बोलो राणा प्रताप की,जय जय वीर शिवाजी की।
जय बोलो आल्हा ऊदल की,जय बन्दा बैरागी की।।
जय पद्मिनियों के जौहर की,जय झाँसी की रानी की।
जय सुभाष,जय भगतसिंह,जय शेखर की कुर्बानी की।।
जय जय जय अब्दुल हमीद,जय अशफाकउल्ला खान की
आओ सब मिलकर  जय बोलो ,अपने हिदुस्तान की,
भारत देश महान की—–
सोचो कैसे हर दुश्मन को,हमने मार भगाया है।
आजादी का सूरज कैसे ,इस गुलशन में आया है।
कितने मतवालों ने हँस कर,अपना शीश कटाया है,
तब जाकर ये अमर तिरंगा, लहर-लहर लहराया है।।
अमर तिरंगे की जय बोलो,जय इसके सम्मान की।।
आओ सब मिलकर जय बोलो अपने हिदुस्तान की,
भारत देश महान की—–
आज चमन की हरियाली पर ,किसने नजर गड़ाई है,
अमृत की बगिया में किसने ,विष की बेल लगाई है।
बलिदानी धरती पर क्यों ,काली बदली सी छाई है,
कुछ जयचंदो ने शायद फिर ,मक्कारी दिखलाई है।।
जयचंदो को राह दिखादो,वीरो,फिर शमशान की
आओ सब मिलकर जय बोलो अपने हिदुस्तान की
भारत देश महान की—–
कुछ गद्दारों से अपने ,गुलशन को हमे बचाना है,
वीर शहीदों के लहू का,हमको कर्ज चुकाना है,
फिर बलिदानी गाथाओं के गीत पुराने गाना है,
अन्यायी,पापी, कायर को,यम के लोक पठाना है।।
बजा रही है फिर से चंडी रणभेरी संग्राम की।
आओ सब मिलकर जय बोलो अपने हिदुस्तान की,
भारत देश महान की—-
***************************************
३* डॉ. प्रिया सूफ़ी
शिक्षा – बी ए ( हिंदी आनर्स), एम ए ( हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू), बी एड , डाक्टरेट – हिंदी (लिंग्विस्टिक्स) .
सम्प्रति – होशियारपुर, पंजाब कॉलेज में व्याख्याता
कार्यकारी भाषा ज्ञान – संस्कृत, प्राकृत,  अपभ्रंश,  ब्रज।
            झांसी की रानी
मैं नहीं दूँगी धरा को आज हूँ ज़िद पर अड़ी,
जीत मिलती है उसी को, आँधियों से जो लड़ी।
बात झाँसी की कहाँ है, प्रश्न है यह देश का,
तुम कहो वारिस नहीं पालन करो आदेश का,
बाल ले मासूम सा अब सोचती है वो खड़ी…!
जीत मिलती है…!
है नहीं सर पर पिया पर जोश का सागर भरा,
हम बहा कर खून कर दें, मात का आँचल हरा,
रोक पाएगा कहाँ उसको नदी जो चल पड़ी…!
जीत मिलती है…!
चाँद काँपा झुक गया,सूरज नवाने सर लगा,
हर दिशा लेती बलाएँ, जोश से है नभ पगा,
हाथ में तलवार ले जब अश्व पर रानी चढ़ी…!
जीत मिलती है…!
खूब मारे खूब काटे, बच नहीं पाए कहीं,
जान अपनी को बचाने राह भी पाए नहीं,
यह नहीं औरत कहें सब मर्द है सर पे खड़ी…!
जीत मिलती है उसी को….!
*****************************************
४* सत्य प्रकाश  सिंह (सत्या सिंह)
शैक्षिक योग्यता —   एम. ए ( हिंदी)
जन्म तिथि– ०१ फरवरी ७८
मो. न, ०९९५६११८१९९
ग्राम – डंड़ियामऊ,पो.–रानीकटरा,
जिला– बाराबंकी(उ. प्र.)
          रानी लक्ष्मी बाई
सीता सा था ओज तेज दुर्गा की अनुयायी थी,
ऐसी वीर सिंहनी अपनी रानी लक्ष्मी बाई थी।
बालाओं के रहन सहन अरु भावो से अंजान थी वो,
कानपुर के नाना  जी की मुहबोली संतान थी वो।
खेल न भाते गुडियों के ,भाती नही रंगोली थी।
तलवारे, शमशीर कटारे सब उनकी हमजोली थी।
मां दुर्गा साक्षात रुप धर नाना के घर आयी थी।
ऐसी बीर सिंहनी अपनी रानी लक्ष्मी बाई थी।
ब्याह हुआ तज नाना को बचपन की हर एक गली।
बन कर नयी नवेली दुल्हन रानी अब ससुराल चली।
बदला समय खूब तेजी से झांसी का दु्र्भाग्य हुआ।
मेंहदी का रंग भी धुला न था अौर रानी हो गयी बिधवा।
घोर बिपत्ति मे पड़ हुई अब जीवन की तरुणाई थी।
ऐसी बीर सिहनी अपनी रानी  लक्ष्मी  बाई थी.।
अंग्रेजो ने अवसर देखा धावा बोल दिया झांसी पर।
मार काट कोहराम मचाया  बीर चढाये  फांसी पर।
  देख प्रजा की दीन दशा रानी के दिल मे आग उठी।
अन्तर मे सोयी रण चंडी रानी के अन्दर जाग उठी।
दुधमुँँहे पुत्र को बांध पीठ पर युद्ध भूमि मेंं आयी थी
ऐसी बीर सिंहनी अपनी  रानी लक्ष्मी  बाई थी  ।
 रानी ने दो सखियों के संग ऐसा कोहराम मचा डाला।
चली जिधर तलवार रानी की कत्ले-आम मचा डाला।
भगदड़ मची फिरंगियो मे पांव उखड गये दुश्मन के,
रानी कहा थी रुकने वाली आजादी थी उनके मन मे।
बढ़ी युद्ध मे रानीआगे ग्वालियर   बिजय भी पायी थी
ऐसी बीर सिंहनी अपनी  रानी लक्ष्मी  बाई थी।
अड गया अश्व आगे जाकर आगे लंबा नाला था।
दुश्मन की सेना पीछे थी वक्त बदलने वाला था।
भिड़ गयी अकेले ही रानी शत्रु पर पलट कर वार किया।
दम रहा जब तक  रानी मे  दुश्मन का संहार किया।
गिर गयी अश्व से फिर रानी बीर गति अब पायी थी।
ऐसी बीर  सिंहनी  अपनी  रानी लक्ष्मी बाई थी।
जीते छू न सका दुश्मन रण  की बडी विजेता थी।
1857  क्रातिं  की  वह सबसे बड़ी  प्रणेता थी ।
इतिहास लिख दिया रानी ने चहुंँ ओर जयजय कार हुई।
गुलामी मेंं जकड़े भारत मेंं आजादी की लहर तैयार हुई।
हो गयी धन्य धरा जिसने ऐसी बाला उपजायी थी।
ऐसी  बीर सिंहनी  अपनी रानी  लक्ष्मी बाई थी।
**************************************
५* अजय कुमार तोमर
पता-मकान संख्या 7/311
महौल्ला ईश्वर पूरी बडौत
जनपद-बागपत उ.प्र.
       चरणों में पुष्प चढ़ाता हूँ।
आजादी के दीवानों के चरणों में पुष्प चढ़ाता हूँ।
मैं भगत सिहँ आजाद गुरु बिस्मिल की याद दिलाता हूँ।।
प्राण गँवाकर वीरों ने भारत मां को आजाद किया।
भगत सिहँ की कुर्बानी ने एक नया इतिहास दिया।
शेखर ने अपनी गोली से अपने ही तन को लाश किया।
लाला जी का बदला लेकर सरदार ने एक उल्लास दिया।
बटुकेश्वर ने मर मिटने का नव युवकों को अहसास दिया।
मैं उन जाँबाज सपूतों के तुमको जज्बात सुनाता हूँ।………
फाँसी के फंदे को चूमां और मौत से उनकी यारी थी।
भारत माता उन वीरों को अपने प्राणों से प्यारी थी।
आजादी के दीवानों पर भारत माता बलिहारी थी।
उस शमाँ के परवानों की तो छटा हिन्द में न्यारी थी।
अंग्रेजी साम्राज्य के सर वो बागी सेना भारी थी।
उन शूरवीर महावीरों की मैं गौरव गाथा गाता हूँ।।……..
उनकी कुर्बानी के दम पर ही आज तिरंगा लहराता।
उनके खूँ से सिंचिंत गुलशन चहुँ और महकता लहलाता।
उन वीरों की कुर्बानी से हर सीना चौड़ा हो जाता।
दुनिया में भारत का परचम उनके ही दम से लहलाता।
उन रणवीरों के चरणों में श्रद्धा से शीश झुका जाता।
उन वीरों के अफसानों को मैं गीत बना कर गाता हूँ।….
अब गम है मुझको बस इतना उनको बिसराया जाता है।
उनके नामों का राजनीति में लाभ उठाया जाता है।
कुछ त्योहारों पे उनका फोटो खूब सजाया जाता है।
मौका मिलते ही देश प्रेम का ढोंग रचाया जाता है।
कुछ रूह स्वर्ग में रोतीं हैं जब देश को खाया जाता है।
मैं देश के उन गद्दारों को कुछ शर्म करो समझाता हूँ।…….
बेशक हम सब चुप बैठे हैं लेकिन बिल्कुल अंजान नही।
इन चंद लूटेरों की छोड़ो इनका कोई ईमान नही।
ये भारत भगतसिंह का है दुनिया इससे अंजान नही।
गांधी सुभाष जैसा नायक और पन्ना सा बलिदान नही।
राणा सी आन नही जग मेंं और छत्रपति सी शान नहींं
अशफाउल्ला की बातों को मैं छंद बना कर गाता हूँ।।……
 *****************************************************
६* पुष्पलता शर्मा
स्थाई पता- -बी -602, एयरलाइनर्स ग्रुप हाऊसिंग सोसाइटी ,प्लाट नं -27 सेक्टर -10, द्वारका , नई दिल्ली-110075
       आओ भारत बचायें
तिल-तिल मरते भारत को अब,मिलकर हमें बचाना है
बढ़ते आतंकी बरगद को, जड़ से हमें मिटाना है ।।
दहशत का ये नंगा नाटक, और न होने देंगे हम,
बच्चों की किस्मत को खूँ से, और न धोने देंगे हम ।
क़्लम किताबों के हाथों को, पत्थर नहीं थमाना है,
तिल-तिल मरते भारत को…
फूल खिलेंगे अम्नो-चैन के, फिर केसर की घाटी में ।
भारत माँ के बैरी को गर, मार मिलाएं माटी में ।
विष के बीज न फूटे आँगन, अमृत बेल लगाना है
तिल-तिल मरते भारत को…
बम की सेज सजाने वाले, और न आगे बढ़ पायें ।
सरहद पर छिप लड़ने वाले, बचकर नहीं निकल पायें
शेरों से भिड़ने का होता, क्या अंजाम बताना है,
तिल-तिल मरते भारत को…
वीरों की क़ुर्बानी को अब, व्यर्थ न जाने देंगे हम,
एक वीर के बदले में अब, सौ-सौ जानें लेंगे हम ।
छोड़ो काग़ज़ के समझौते,और न धोखा खाना है ।
तिल-तिल मरते भारत को…४
सोच समझ कर क़दम बढ़ाओ,तभी सुनहरा कल होगा,
मज़हब की दीवार से निकलो,खुशियों का हर पल होगा ।
हिन्द एक है एक रहेगा, सपना यही सजाना है।
तिल-तिल मरते भारत को..
नहीं सहेंगे चहुँ दिश क्रंदन, सैनिक के परिवारों का,
घाटी पर बढ़ता हमला अब,अरि के बर्बर वारों का ।
मौन न शीश झुकायेंगे हम, मिल आवाज़ उठाना है,
तिल-तिल मरते भारत को…
“**************************************
७* कुमार गौरव ‘पागल’
पता:- बारीडीह बस्ती, जमशेदपुर,
झारखण्ड- 831017।
संपर्क:- 9955362825
       वो ले गया बसंती चोला
वो ले गया बसंती चोला….
वो ले गया बसंती चोला।
जिसे पहन कर लहू में आती रवानी थी,
जिसे ओढ़कर लोहा लेने की ठानी थी,
जिस चोले को देख दुश्मन का जमीं डोला,
वो ले गया बसंती चोला…
वो ले गया बसंती चोला।
भगत जैसे लाल ही इस देश की शान है,
फिर से जन्में भगत, हर माँ का अरमान है,
सुन कर उसके किस्से दिल मेरा ये बोला,
वो ले गया बसंती चोला…
वो ले गया बसंती चोला।
हँसते हुए चूम ले फांसी का फंदा,
होता है लाखों में ऐसा कोई बंदा,
लहर चल उठी जब उसने इंक़लाब बोला,
वो ले गया बसंती चोला….
वो ले गया बसंती चोला।
आज अपनों के हाथों ही देश गुलाम है,
फिर से आज तुम्हें पुकारती आवाम है,
अपने रंग से रंग दे मेरा भी चोला,
वो ले गया बसंती चोला…
वो ले गया बसंती चोला।
*****************************************************
  ८*  डॉ.सुमन सचदेवा
मलोट,मुक्तसर(पंजाब)
         वीरों को नमन
जिनके साहस की गाथा,गाता है यह जग सारा
उन वीरों की कुर्बानी को ,शत -शत नमन हमारा
खेल खिलौने छोड़ जिन्होने,थे हथियार उठाए
आँखों में थे आजादी के सुंदर सपन सजाए
जान हथेली पर रखकर था दुश्मन को ललकारा
उन वीरों की ……..
देश की खातिर घर छोड़ा,सब ऐश्वर्य ठुकराया
फांसी के फंदे को चूम,हंस हंस के गले लगाया
जिनके लिए तिरंगा ही था जान से बढ़कर प्यारा
उन वीरों की ……..
उजड़ी मांग ललनाओं की,टूटी बहनों की राखी
देखके लाशें बेटों की ,मांओं ने छाती पीटी
दुश्मन की गोली ने छीना ,बाप का एक सहारा
उन वीरों की ….
ऐ नवयुवको उनकी शहादत को तुम भूल न जाना
जहां पे उनका रक्त बहा, तुम वहां पे फूल बिछाना
नक्शे कदम पर उनके चलो,अब यही है फर्ज़ तुम्हारा
उन वीरों की ………
***************************************************
Loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here