वीर एवं वीरांगनाएं (विशेषांक, जुलाई 2017) – कुण्डलियाँ

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स्वर्णमयी तकदीर
1)
बोलें जिनके कर्म ही ,ओज भरी आवाज़
 ऐसे दीपित से रतन ,जनना जननी आज |
जनना जननी आज , सुता झाँसी की रानी
वीर शिवा सम पुत्र , भगत से कुछ बलिदानी |
कुछ बिस्मिल, आज़ाद ,धर्म से देश न तोलें ,
गाँधी और सुभाष , भारती जय-जय बोलें ||
 2)
लिख देंगे नव गीत हम ,भरकर जोश , उमंग ,
गूँज उठे हुंकार अब , विजय नाद के संग |
विजय नाद के संग  , सहेजें गौरव अपना ,
करना है साकार , मात का सुन्दर सपना |
तूफानों का वीर , पलटकर रुख रख देंगे ,
स्वर्णमयी तकदीर , वतन की हम लिख देंगे ||
डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा
मो. 9824321053
H-604 ,प्रमुख हिल्स ,छरवाडा रोड ,वापी
जिला- वलसाड (गुजरात)
396191
 
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