कैली की कहानी (भाग14,15एवं 16)समाप्ति

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कैली की कहानी -14

नौजवान घर आया। उसने कैली को सब बताया । कैली ने बिना देरी किए अपने पिता का ध्यान किया। आँखें खोलते ही कैली ने एक मंत्र बोला। मंत्र बोलते ही वहाँ एक चमत्कारी चादर प्रकट हुई। कैली ने अपने पति को वो चादर राजा के सामने ओढ़ कर चिता पर लेट जाने की सलाह दी।कैली ने पति को विश्वास दिलाया कि उसे आग छुएगी भी नहीं और जब काफी अंधेरा हो जाएगा तब कैली उसे राख में से निकाल लाएगी और सवा महीना तक नौजवान घर में  छुप कर रहेगा।  नौजवान जादुई चादर लेकर राजा के पास पहुंच गया । चिता सजाई गई ।नौजवान चमत्कारी चादर अच्छे से लपेट कर चिता पर लेट गया ।चिता पर बहुत सारी सूखी लकड़ियां डाली गई ताकि नौजवान के बचने की उम्मीद न रहे।चिता को आग लगा दी गई । देखते ही देखते चिता आग की लपटों में जल कर दहकती लाल राख के बड़े से ढेर में बदल गई । राजा सवा महीने के इंतज़ार का सोच कर  अपने सेवकों व मंत्रियों के साथ महल की ओर लौट गया।आधी रात को कैली चिता के पास पहुंची। उसने एक मंत्र बोला और गर्म राख स्वयं ही नौजवानों के उपर से हट गई ।नौजवान बिल्कुल सुरक्षित आग में से निकल आया।उसका बाल भी बाँका नहीं हुआ था । नौजवान सवा महीने तक घर में छुपा रहा ।इस दौरान कैली ने उसे खूब अच्छा खाने और मोटा हो जाने की सलाह दी । कैली ने अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए नौजवान की दाढ़ी, बालों और नाखूनों को इतने लम्बे कर दिये जैसे वर्षों न काटे गए हों ।  सवा महीना बीतने के बाद कैली ने अपने पति से कहा कि राजा के अत्याचारों का आज अंतिम दिन है । मैं  जैसा बोलूँ आप वैसा ही जाकर राजा से कहना। नौजवान सवा महीना समाप्त होने के बाद उसी स्थान पर  जाकर लेट गया जहाँ उसे जलाया गया था । राजा प्रजा के सामने दिखावे के लिए  उस स्थान पर मंत्रियों और सेवकों सहित पहुंचा और हैरान रह गया कि  लड़का वहां  आराम से लेटा हुआ था । 

   कैली की कहानी – 15

 अब राजा को सच में उत्सुकता हुई और उसने नौजवान से पूछा कि बताओ हमारे पूर्वज कैसे हैं । नौजवान  वहां एकत्र पूरी भीड़ को संबोधित करके कहा कि  आहा हा हमारे महाराज तो महाप्रतापी और महा पवित्र  आत्मा हैं ही इनके पूर्वजों की आत्माएँ तो महापवित्र हैं ।उनकी स्वर्गलोक में पूजा होती है। उनको वहां स्वर्गलोक का स्वर्गीय  राज्य प्राप्त है । वो वहां न्याय और अपने पराक्रम के लिए प्रसिद्ध हैं । वहां अप्सराएँ उनके इर्द गिर्द घूमती हैं । ऐसी ऐसी उनकी रानियाँ हैं जिनके बाल शुद्ध सोने के बने हैं और वो हंसती हैं तो उनके मुँह से हीरे पन्ने झरते हैं ।स्वर्गलोक का दिव्य नज़ारा अद्भुत है।वहां दूध और शहद की नदियाँ बहती हैं ।वहां की सड़कें हीरे पन्नों से जड़ी हैं।    मैं तो उन सब की आन बान शान देख कर दंग रह गया । उन्होंने मुझे महाराज का भेजा दूत समझ कर मेरी बहुत सेवा की और राजा जी के नाम ये संदेश भेजा कि उनसे मिलने का बहुत मन करता है अगर हो सके तो एक बार उन्हें आकर मिल जाए। 

          मूर्ख और लालची राजा नौजवान की बातों में आ गया । नौजवान ने ऐसे ऐसे चमत्कार दिखाए थे इसलिए राजा को उसका काल्पनिक कथन सत्य प्रतीत हो रहा था । राजा ने उसी समय हुक्म दिया  हमारी चिता सजाई जाए। कपटी सेवादार बोला नहीं महाराज मुझे इसमें  इसकी कोई चाल लग रही है । नौजवान तुरंत बोला महाराज मुझे आपके पूर्वजों का  एक विशेष संदेश देना था। राजा ने उत्सुकता से पूछा कहो क्या संदेश है । लड़का बोला महाराज आप मेरी हालत देखिए । स्वर्गलोक में आपके पूर्वजों को सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं पर उनके बाल और नाखून काटने वाला कोई माहिर सेवादार नहीं है ।उन्होंने कहा है कि आप पृथ्वी से अपना निजी सेवादार साथ लेकर आएं।

                    राजा ने उसी समय कपटी सेवादार की ओर इशारा कर हुक्म सुनाया दो चिताएं सजाई जाएं, हमारा निजी सेवादार भी हमारे साथ स्वर्गलोक जाएगा।सब लोग महाराज की जयजयकार करने लगे।कपटी सेवादार ने वहां से भागने की कोशिश की । सैनिकों ने उसे तुरंत जंजीरों में जकड़ लिया । उसके हाथ पैर बांध दिये । अब वो पछताने लगा कि उसने क्यों राजा को नौजवान की पत्नी छीन लेने के लिए उकसाया था। 

    कैली की कहानी – 16

राजा नौजवान से बहुत प्रभावित हो चुका था और राजा की आँखों में  स्वर्गीय राज्य के दृश्य तैर रहे थे जिनका वर्णन नौजवान ने अत्यंत सजीवता से किया था। राजा ने पूरी प्रजा के सामने घोषणा की कि  हमारे स्वर्ग से लौटने तक ये नौजवान राजपाट की देखभाल करेगा।नौजवान ने ससम्मान सर झुका कर राजा का हुक्म स्वीकार किया । 

                     दो चिताएं सजाई गईं । एक पर चीखते चिल्लाते सेवादार को बाँध कर डाल दिया गया । सेवादार की पत्नी दुहाई दे रही थी पर जयजयकार के शोर में उसकी कोई एक नहीं सुन रहा था । राजा स्वयं शान से चिता पर लेट गया । नौजवान मन ही मन में मुस्कुरा रहा था। दोनों चिताओं को आग लगा दी गई । आग की तपिश लगते ही राजा चीखा।पर लकडिय़ों के भार के नीचे दबा राजा  निकल कर भाग नहीं सकता था और उसकी चीखें जयजयकार में दब गईं । राजा और कपटी सेवादार का अंत हो चुका था । 

           नौजवान, उसकी पत्नी कैली और उसकी माँ का धूमधाम से महलों में स्वागत किया गया ।कैली के परामर्श और बुद्धिमता से राज्य का प्रसार चहुँ ओर फैल गया । प्रजा इतनी सुखी हो गई कि किसी को ध्यान ही नहीं रहा कि राजा स्वर्गलोक से कभी लौट कर क्यों  नहीं आया? 

समाप्त

धन्यवाद 

नवीन किरण ,हिंदी अध्यापिका,करतारपुर ,जालंधर

7696157281

 

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http://www.hforhindi.com/bal-kahani-sangrah/

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