दुआ से काम होते हैं! (गज़ल)

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दवा से जो नहीँ होते दुआ से काम होते हैं! 
जहाँ में आज भी ऐसे करिश्मे आम होते हैं!! 
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गलत राहों से जीवन में हमेशा दूर तुम रहना!                         बुरे हर काम के देखो बुरे अंजाम होते हैं!! 
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निराला सा चलन देखा जहाँ में आज लोगों का! 
बगल में है छुरी रखतें जुबां पे  राम होते हैं!! 
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दिलों में इस ज़माने के पनपती साज़िशें हरदम! 
बशर की जान के तो बस ज़रा से दाम होते हैं!! 
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समझते हैं कहाँ ज़ालिम हमारे दर्द को अब भी! 
जो’हँस-हँस कर वो’ पीते हैं लहू के जाम होते हैं!! 
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कहाँ मिलती है अहले-दिल को भी मंज़िल मुहब्बत की
बशर तो प्यार की खातिर सदा बदनाम होते हैं!! 
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बड़ी शातिर है ये दुनिया नहीँ काबिल भरोसे के! 
यहाँ किस्से फरेबों के तो’सुब्हो -शाम होते हैं!! 
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रखो किरदार की दौलत हमेशा ही ज़माने में! 
समय के साथ जो चलते उन्हीं के नाम होते हैं!!
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मुसाफ़िर इस गज़ल में भी पते की बात को कहता! 
भरोसा हो जिन्हें खुद पर नहीँ नाकाम होते हैं!! 
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धर्मेन्द्र अरोड़ा’मुसाफ़िर’ ,शिक्षक
9034376051 

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