टूटा पहिया:एक प्रेरक दृष्टिकोण

2
2043

टूटा पहिया: एक प्रेरक दृष्टिकोण

बहुमुखी प्रतिभा के धनी साहित्यकार एवं प्रयोगवादी कवि के रूप में विख्यात डॉ. धर्मवीर भारती की बहुचर्चित कविता “टूटा पहिया “लेकर आज मैं हाजिर हूँ।आशावादिता से भरी यह कविता टूटे मानव मूल्यों को पुन:जीवित करने की आस संजोती है। महाभारत युद्ध में अधर्म और अत्याचार का विरोध करते हुए दुस्साहसी अभिमन्यु ने रथ के टूटे पहिए से ही कौरवों की अक्षौहिणी सेनाओं का सामना किया था।अपने पक्ष को असत्य जानते हुए भी महाभारत युद्ध में बड़े-बड़े महारथियों में किसी ने भी अभिमन्यु की असहाय आवाज़ पर ध्यान नहीं दिया। यहाँ टूटा पहिया प्रतीकात्मक रूप में है।आज का युगअंधा युगहै।आज सर्वत्र मानवीय मूल्य टूट रहे हैं।कवि को उम्मीद है कि अभिमन्यु जैसे कोई साधारण व्यक्ति आयेगा जो इन मूल्यों को स्थापित करेगा एवं अन्याय ,अत्याचार व अधर्म के खिलाफ एकजुट होगा।आज ऐसा व्यक्ति जो शोर्यहीन है,अन्याय से लड़ने में असमर्थ है ,वह टूटा हुआ व्यक्ति भी नवयुग का निर्माण कर सकता है ऐसी आशावादी सोच इस कविता में कवि ने दिखाई है।अर्थात् शक्तिहीन मानव से भी मानव मूल्यों के उत्थान की परिकल्पना संभव है।

मैं रथ का टूटा हुआ पहिया हूँ
लेकिन मुझे फेंको मत !
क्या जाने कब,इस दुरूह चक्रव्यूह में
अक्षौहिणी सेनाओं को चुनौती देता हुआ
कोई दुस्साहसी अभिमन्यु आकर घिर जाय !
अपने पक्ष को असत्य जानते हुए भी,बड़े-बड़े महारथी
अकेली निहत्थी आवाज़ को
अपने ब्रह्मास्त्रों से कुचल देना चाहें,तब मैं
रथ का टूटा हुआ पहिया,उसके हाथों में
ब्रह्मास्त्रों से लोहा ले सकता हूँ !
मैं रथ का टूटा पहिया हूँ,लेकिन मुझे फेंको मत
इतिहासों की सामूहिक गति
सहसा झूठी पड़ जाने पर,क्या जाने
सच्चाई टूटे हुए पहियों का आश्रय ले !

विशेष –सस्वर प्रस्तुति एवं  विश्लेषण 
डॉ.पूर्णिमा राय अमृतसर।

Loading...
SHARE
Previous articleवक्त बदलेगा हमारा देखना( गज़ल)
Next articleदुआ से काम होते हैं! (गज़ल)
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

2 COMMENTS

  1. निसंशय यह उत्कृष्ट श्रेणी की साहित्यिक पत्रिका प्रतीत ह रही है. हिन्दी साहित्य की गरिमा को संवर्धित करती ऐसी पहल का स्वागत है। क्या मैं भी अपनी रचनाएं (कविता, गीत या कहानी) इसमें प्रकाशनार्थ सम्प्रेषित कर सकता हूँ? यदि हाँ , तो कैसे? साथ ही यह भी बतलाई कि क्या अगस्त अंक की रचनाएं चयनित हो चुकी हैं? अंत में हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

    सतीश बर्मा,
    मुम्बई

    • नमस्कार सतीश जी…यहाँ पर दैनिक प्रकाशन भी होता है ..हरेक विधा में बेहतरीन रचनाएं लगाई जाती है ।विशेषांक एक दो महीन बाद निकाला जाता है..आप drpurnima01.dpr पर ईमेल करें यूनीकोड में…

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here