कैली की कहानी (भाग 9एवं 10)

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कैली की कहानी -9 

सेवादार ने अपनी पत्नी से बालों की सुनहरी लटें ली और राजा के पास पहुंच गया ।जाते ही बोला महाराज माफ करें  आप चाहे कितने भी बड़े राजा क्यों न हो पर आप के एक सैनिक के पास जो स्वर्ण का खज़ाना है वो आप कल्पना भी नहीं कर सकते। राजा कानों का कच्चा और अत्याचारी था।उसके राज्य में प्रजा दु:खी थी। राजा ने हैरानी से पूछा कौन सा खज़ाना? सेवादार ने राजा को कैली की सुंदरता  के बारे में बताया।सबूत के तौर पर कैली के बाल दिखाए । राजा ने  राज जौहरी को बाल परखने के लिए बोला। राज जौहरी ने बताया कि ये सौ प्रतिशत शुद्ध सोने के बने हैं ।

         धूर्त राजा ने नौजवान सैनिक से उसकी चमत्कारी पत्नी छीन लेने का मन बना लिया ।राजा ने सेवादार से  पूछा कि क्या किया जाए । सेवादार ने कहा महाराज आप सैनिक को बुला कर कोई असंभव काम करने का हुक्म दें।न कर सकने की सूरत में मृत्यु दंड का प्रावधान रखें।सेवादार ने राजा को एक असंभव काम भी सुझाया।

               राजा ने सैनिक को बुलाने का हुक्म दिया।नौजवान को हैरानी हुई कि राजा ने उसे क्यों बुलाया है । नौजवान राजा के समक्ष प्रस्तुत हुआ । राजा ने नौजवान सैनिक से  कहा कि हमने सुना है तुम हमारे बहुत वफादार सैनिक हो और तुम हमारे लिए कुछ भी कर सकते हो।नौजवान सैनिक ने मुस्तैदी से कहा जी महाराज! राजा ने नौजवान को कड़कती आवाज़ में हुक्म दिया कि हम चाहते हैं कि हमारे महल से पाँच मील दूर पड़ी खाली ज़मीन पर रातों रात एक बाग लगे , पेड़ बड़े हों, उनमें फल लगें और  सुबह हम उस बाग में बैठ कर फल खाएं । अगर तुम  ऐसा नहीं कर सके तो तुम्हें मृत्यु दंड दे दिया जाएगा और तुम्हारा घर परिवार जब्त कर लिया जाएगा ।

         सैनिक के घबराहट से पसीने छूटने लगे । वो तुरंत समझ गया कि ये राजा की कोई चाल है ।ये सब अवश्य ही कैली की असलियत पता चल जाने के कारण हुआ ।नौजवान मुंह लटकाए घर की ओर चल दिया ।

कैली की कहानी -10

नौजवान घर पहुंचा ।उसे देखते ही कैली समझ गई कि  कोई बड़ी मुसीबत आ चुकी है। उसने नौजवान से पूछा कि क्या हुआ है? नौजवान ने कातर स्वर में कहा कि तुम ठीक ही कहती थी  कुत्ते की खाल जलानी नहीं चाहिए थी।अगर वो न जलाई होती तो आज इस समस्या से आसानी से निपटा जा सकता था । कैली ने बिना किसी घबराहट के कहा कि उसे समस्या बताई जाए।

      नौजवान ने पत्नी को अचानक आई विपत्ति के बारे में बताया। कैली ने पिछले दिनों हुई घटनाओं को याद करते हुए समझ लिया कि बाल बनाने आई स्त्री का ही सब किया धरा है।कैली ने कहा जो होना था हो गया अब हमें इस समस्या का हल निकालना होगा।कैली ने एक पैर पर खड़ी रह कर नागराज पिता का स्तुति गान किया । अंतर्ध्यान हो कर  उसने अपने पिता से बात की ।नागराज ने पुत्री को रातों रात बाग लगाने व उसमें फल लग जाने का मंत्र बताया । 

        कैली ने पति से कहा कि  वो शाम से ही जितनी भी हो सके फलदार पेड़ों की टहनियाँ इकट्ठा कर लाए।नौजवान ने ऐसा ही किया।फिर कैली ने उसे वो सब टहनियाँ उसे रात के अंधेरे में उस खाली पड़ी ज़मीन में यहां वहां गाड़ आने को कहा जहां बाग लगाना था। नौजवान ने वैसा ही किया ।

                   सुबह होने से पहले स्वयं कैली उस स्थान पर गई । कैली का दिव्य स्वरूप देखते ही बनता था ।कैली के कदम रखते ही मानो बेजान टहनियों में जान आ गई ।वो छम छम करती जिस भी टहनी के पास से गुज़र जाती वो टहनी लहलहा कर बड़ा पेड़ बन जाती । कैली के मंत्र बोलते ही पेड़ फलों से लद जाते।कैली ने पूरे बाग का मंत्र बोलते हुए चक्कर लगाया। बाग बड़े बड़े पेड़ों से भर गया जो फलों से भरे थे। कैली ने बाग में फलों से लदी टहनियों को देख कर खुशी से खिलखिला कर अपने पति की ओर देखा । कैली के हँसते ही पूरे बाग में रंग बिरंगे स्वर्गीय फूल खिल उठे । ऐसे फूल  जो पृथ्वी पर कभी किसी ने नहीं देखे होंगे । पूरा बाग प्रकृति के अपार सौंदर्य का अति उत्तम नमूना बन चुका था ।कहीं हरी घास कहीं दिव्य फूल  और चारों ओर रसभरे फलों से लदे पेड़ ।

Continue. …….

   

नवीन किरण,अध्यापिका,करतारपुर,जालंधर    

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