चैन दिल को भी यूँ नहीं आया(गज़ल)

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चैन दिल को भी यूँ नहीं आया।
आसरा तेरा जो नहीं पाया।।

फिर वो सूरज कहाँ गया बोलो।
कोई बादल अगर नहीं छाया।।

धूप भी साजिशें कराती है।
खेलता मुझसे मेरा जो साया।।

सब कहानी हैं और क़िस्से हैं।
कौन उसका पता लिये आया।।

नफ़रतों में ही क्यों रहे उलझे।
प्यार का गीत क्यों नहीं गाया।।

जब भी आँखें हुई हैं बंद मेरी।
पास अपने तुझे ही बस पाया।।

फिक्र कर ले ज़रा सी रिश्तों की।
साथ किसके गयी है ये माया।।

यास्मीं वो ही मेरा हमदम है।
मुझको मेरे क़रीब जो लाया।।


डॉ.यासमीन ख़ान ,मेरठ

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