कैली की कहानी (भाग5एवं 6)

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कैली की कहानी -5

नागरानी ने नागराज को सुझाव दिया कि क्यों न  हम कैली जैसी चमत्कारी इच्छाधारी नागिन को सदैव के लिए इस नौजवान की रक्षक के रूप में तैनात कर दें वो भी इस तरह कि इस लड़के को कभी शक न हो कि इसके साथ कोई नाग जा रहा है क्योंकि अगर इस लड़के को पता चला कि ये नागिन है तो वो डर जाएगा और अगर उसे पता चला कि ये नागिन उसके लाभ के लिए है तो भी वो इन्कार कर देगा। माता पिता ने कैली से बात की । कैली सहर्ष अपने पिता को नवजीवन देने वाले की रक्षक बन कर रहने को तैयार हो गई । कैली ने समस्या का समाधान सुझाया कि वो नौजवान के साथ एक वफादार कुत्ते के रूप में रहेगी जिसका पता ताउम्र उस लड़के को नहीं लगेगा ।एक अभिमंत्रित की गई कुत्ते की  खाल लाई गई । जैसे ही कैली ने वो खाल धारण की वो कुत्ते के रूप में बदल गई । नागराज ने पुत्री से कहा कि कभी भी कोई मुसीबत आए तो मुझे स्मरण करना , मैं अपनी समस्त शक्तियों से नागलोक में रहते हुए ही तुम्हारी सहायता करूंगा ।
                      नागराज एक बार पुनः नौजवान के पास आकर बोले कि ठीक है तुम हमसे कोई बहुमूल्य वस्तु नहीं स्वीकार करोगे पर एक छोटी सी भेंट अवश्य स्वीकार करो , ये मेरी तुम से विनती है ।नौजवान ने प्रश्नसूचक दृष्टि से देखा । तभी सेवक एक रस्सी से बंधा कुत्ता वहां लेकर आए।नागराज ने कुत्ते की रस्सी नौजवान को थमाते हूए कहा इसे अपने साथ ले जाओ। नौजवान वहां से जल्द निकलना चाहता था अतः उसने बिना कोई संदेह किये नागराज की बात मान ली ।

   कैली की कहानी-6

लड़के और कैली को नदी के बाहर छोड़ दिया गया। लड़के ने नदी से बाहर आते ही  सबसे पहले कुत्ते की रस्सी छोड़ दी ताकि वो कहीं भी जाने के लिए आज़ाद रहे।प र वो कुत्ता पीछे पीछे चलते चलते  घर तक पहुंच गया । लड़के ने  घर आकर देखा उसका घोड़ा ज्यों का त्यों बंधा था। लड़के की माँ भाग कर अपने बच्चे से लिपट कर रोने लगी ।लड़का माँ ने पूरी बात छुपा ली क्योंकि वो माँ को डराना नहीं चाहता था । बस यही बताया कि काम की तलाश में गया था और घोड़ा गलती से खो गया था और स्वयं ही घर लौट आया।
                        माँ ने कुत्ते को देख कर पूछा बेटा इसे कहाँ से  ले आया? लड़का बोला माँ जहाँ अपना घोड़ा मैं और तुम रहते हैं ये भी रह लेगा।कहीं एक कोने में बैठा रहेगा।
                       दिन बीता रात हुई । नौजवान और उसकी माँ रूखा सूखा खा कर सो गए।आधी रात को कैली ने कुत्ते की खाल उतारी पूरा घर अत्यंत सुंदर कैली की दिव्य आभा से जगमगा उठा। वो किसी मंदिर में स्थापित मूर्ति के समान पूजनीय लग रही थी । उसकी काया मणियों के समान चमक रही थी ।उसकी आँखें कानों तक फैल उन्हें छू लेना चाहती थी। वो जिस वस्तु पर दृष्टि डाल देती वो वस्तु उसके तप से पवित्र हो जाती। उसके बाल पैरों तक पहुंच रहे थे जोकि खरे सोने के बने रेशम से कोमल थे।उसके बालों को देख कर ऐसा लगता था मानो कुबेर अपना स्वर्णकोश फैला कर बैठे हों । अप्सराओं सी सुंदर कैली ने एक पैर पर खड़ी रह कर नागराज पिता का स्तुति गान किया। इस के बाद उसने एक हाथ के इशारे मात्र से पूरे घर को अद्भुत रूप से स्वच्छ कर दिया ।उसने सभी बर्तनों में यथायोग्य  अनाज और खाद्य पदार्थ भर दिए। कैली नहीं चाहती थी कि माँ बेटे को अचानक बहुत सी सुविधाएं देकर अचंभित कर दे और कैली का रहस्य उन पर उजागर हो जाए। वो इतना ही करना चाहती थी जो माँ बेटे को आराम से रख सके। कैली ने जांचा बर्तन साफ थे कपड़े धुल चुके थे और सुबह के खाने का अच्छा इंतज़ाम हो चुका था ।कैली ने कुछ नए वस्त्र माँ और पुत्र के पुराने वस्त्रों में इस तरह प्रकट कर दिये कि लड़का सोचे मां लाई है और माँ सोचे लड़का लाया है । अपनी तसल्ली के बाद उस अनुपम सौंदर्य की स्वामिनी ने बिना किसी हिचक के कुत्ते की खाल पहनी और पुनः कुत्ते के रूप में आ गई ।
Continue. ……

नवीन किरण,हिन्दी अध्यापिका,करतारपुर,जालंधर

 

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1 COMMENT

  1. एक रोमांच से भरी कहानी हर पल जिज्ञासा बरकरार रखती है …बहुत खूब…अब आगे कल पढ़ेंगें…

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