मेरे माही

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आज मेरी 27वीं शादी की वर्षगाँठ पर मेरे ‘माही’ मेरे सँवरिया माधव को समर्पित तोहफ़ा स्वरूप मेरी ग़ज़ल

इक नज़र भर सभी अब इधर देख लो।
तुम इबादत का मेरी असर देख लो।

आशिक़ी का न होता है मज़हब कहीं।
देखना चाहो तो डूबकर देख लो।

इश्क़ की उसने कैसे है मूरत गढ़ी।
पास आके ग़ज़ब वो हुनर देख लो।

हैं सभी अपने कोई पराये नहीं।
नैन मूँदो सगर में उतर देख लो।

आ सँजोलेगा तुमको वो मेरा सनम।
आज़माना है तो टूट कर देख लो।

हुस्न कैसे निखरता है यारा मिरा।
राज की बात है पूछ कर देख लो।

राज “माही” मेरा और कोई नहीं।
नाम “माही”का तुम भी सिमर देख लो।

डॉ.प्रतिभा ‘माही’ जो कि ‘भारतीय साहित्य संगम पंचकुला ‘ साहित्यिक संस्था की अध्यक्ष व संस्थापिका हैं तथा एक गज़लकार के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं और आज के दौर में अनेकों उपलब्धियाँ प्राप्त कर लगभग 12-13 वर्षों से साहित्य सेवा में संलग्न हैं ।
डॉ.प्रतिभा ‘माही’ जी ने मंच संचालन करते समय बताया कि ” उनके पति डॉ.मनोज कुमार गुप्ता जो कि पशु पालन एवं डेरिंग विभाग ,हरियाणा में वेटरनरी सर्जन थे , उनका 2 नवम्बर 1998 में (ऑन ड्यूटी ) एक सड़क दुर्घटना में स्वर्गवास हो गया था। आज उनको 17 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं।”
साहित्यिक क्षेत्र में डॉ.प्रतिभा ‘माही’ का पूरी दुनियां में नाम हो ये सपना उनके पति डॉ.मनोज कुमार गुप्ता जी का था , जो आज अपनी मंजिल की ओर दिन प्रति दिन अग्रसर है।
डॉ.प्रतिभा ‘माही’ जी वर्ष 2005 से अब तक डॉ.मनोज कुमार गुप्ता जी की पुण्य तिथि पर उनकी स्मृति में सम्मान समरोह व काव्य गोष्ठी का आयोजन प्रतिवर्ष कराती आ रही हैं। जिसके विषय में आप सभी जानते हैं।

डॉ.प्रतिभा ‘माही’ जी के विषय में चन्द प्रबुद्ध जनों के विचार —-

श्री जसमेर चन्द जी द्वारा
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माही जी!
आपके रुहानी दोहों ग़ज़लों और गीतों ने आपका कद और भी ऊंचा कर दिया है। आपने और भी दोहे अवश्य लिखें होंगे जो सूफियाना रंग में सरोबर होंगे। अब तो उन सब दोहों को संकलित कर आप प्रकाशित करवा दें।
ऐसा करके आप समाज को एक बहुत ही बेहतरीन व उम्दा तोहफा देंगे। हमारे समाज को ऐसी ही साकारत्मक साहित्यक रचनाओं की आवश्यकता व अपेक्षा है।
डॉ विद्या शर्मा जी, सहज जी, भंवर जी, जय जी जैसी महान् विभूतियों ने सहज व मुक्त कंठ से आपकी उत्कृष्ट रचना की प्रसंशा में जो अनमोल शब्द लिखें हैं वे सहेजने योग्य हैं।
मैं समझता हूँ की आप मेरी/हमारी इस मांग को अवश्य पूरा करेंगी कि इन दोहों का शीघ्र अति शीघ्र प्रकाशन करवाएंगी ताकि लोगो को स्वस्थ व प्रेरणादायक साहित्य पढ़ने को मिले। वैसे तो आपकी हर कृति अतुलनीय है।

डॉ.विद्या शर्मा वरिष्ठ कवयित्री द्वारा
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वाह—–! माही जी
अभिनन्दन —!
बहुत खूब—!
साधुवाद—!
कबीरदास की आध्यात्मिकता—!
याद दिला दी💐🌷💐
विद्या शर्मा [6:15pm, 23/09/2015]

डा०रघुनाथ मिश्र ‘सहज’ द्वारा 👇
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माही जी —! आप की लेखनी में दिशाबोथ होता है । कबीर-मीरा -महादेवी की तरह आप की रचनाओं में भी दिशाबोथ होने के नाते आप व आप की श्रजनधर्मिता कालजई होने की ओर अग्रसर हैं। मेरी मंगलकामनाएं हैं कि आप कि छवि ऐसी ही निखार व उभार की राह पर रहे।
डा०रघुनाथ मिश्र ‘सहज’
[8:36am, 24/09/2015]

जय सिंह आर्य जी द्वारा
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अध्यात्मिकता से जुड़े आपके ये दोहे बड़े ही जानदार और प्रेरणादायक माही बहन 👌👌👌 बहुत बहुत बधाई
[9:20pm, 23/09/2015] जय सिंह आर्य जी

 

डॉ०प्रतिभा ‘माही’ की कलम से
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विद्या जी आज आपने मुझे जो सम्मान दिया है मेरे लिए वो अबतक की सबसे बड़ी उपाधि है उसके आगे मंचों पर मिले सभी अन्य सम्मान बहुत ही छोटे लगते हैं।
पहले आपने कई बार मीरा की उपाधि दी और आज कबीर दास जी की ।
डॉ.बाल शौरि रेड्डी जी ने महादेवी वर्मा जी की उपाधि से नवाज़ा।
( कबीर-मीरा -महादेवी )
👆👆👆👆👆
मेरे लिए ये तीनों उपाधियाँ मेरे लिए सबसे अमूल्य तोहफ़ा व रत्न हैं जो मेरी ज़िन्दगी अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं ।
[6:31am, 24/09/2015] डॉ०प्रतिभा ‘माही’

आप महान प्रबुद्ध जनों को शत शत नमन

डॉ.प्रतिभा माही की यादें

डॉ.प्रतिभा “माही” इन्सां

पंचकूला / गुरुग्राम
8800117246
Pratibha.manu70@gmail.com

 

 

 

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