कैली की कहानी (भाग 1-2)धारावाहिक

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     कैली की कहानी

     भाग –1 एवं 2

एक कहानी लिखूं जो परियों के पंखों सी विचित्र हो।
एक कहानी लिखूं जो फूलों सी महकती हो।
एक कहानी लिखूं जो तितली के रंगों सी रंगीन हो ।
एक कहानी लिखूं जो मेरी बेटी के मुखड़े सी हसीन हो।
बहुत पुराने समय की बात है, एक गांव में एक गरीब घर का लड़का रहता था । वो बहुत सुन्दर और बहुत बहादुर भी था। घुड़सवारी, तीरंदाजी , तलवारबाज़ी , चित्रकारी किसी भी कला में उसका कोई सानी नहीं था। पर था वो बिल्कुल भोला। पक्षियों की तरह मन का सच्चा ।गाय की तरह सीधा और पवित्र । कवि ह्रदय । ढेरों कविताएँ लिखने वाला ।
उसके पास एक तंदरुस्त घोड़ा था। घोड़ा भी ऐसा जो दौड़ता तो हवा से बातें करता । एक दिन वो वीर नौजवान घोड़े पर किसी काम की तलाश में जा रहा था क्योंकि मां ने कहा था कि अब पैसे कमाने के लिए कोई काम करो। रास्ते में उसे एक नदी दिखाई दी जिसका पानी शीशे के समान चमक रहा था । वो रुका कि घोड़े को पानी पिला सके। घोड़ा पानी पी रहा था तभी उसको बचाओ बचाओ की आवाज़ें सुनाई दी। आवाज़ की तरफ देखा तो नौजवान हैरान रह गया कि पास के जंगल में आग लगी थी और उसमें से बचाओ बचाओ की आवाज़ें आ रही थी ।नौजवान भाग कर वहाँ पहुँचा उसने ध्यान से देखा आग में एक बहुत बड़ा साँप आग में घिरा है ।साँप इन्सानों की भाषा में चिल्ला रहा था । नौजवान हैरान सा देखता रहा। आग की लपटों में घिरा साँप गिड़गिड़ा रहा था कि हे नौजवान ! मुझे इस आग से बचाओ , मैं तुम्हारा ये अहसान कभी नहीं भूलूंगा । लड़का डरा पर सोचा कि ये कोई महान आत्मा है इसे बचाना चाहिए ।
लड़का पहले डरा फिर हिम्मत करके उसने अपने घोड़े पर रखी मोटी चादर साँप पर फेंक दी । आग से बचते बचाते वो लड़का साँप को चादर में लपेट कर सर पर उठाए आग से बाहर निकल आया । जैसे ही लड़के ने साँप को ज़मीन पर छोड़ना चाहा साँप पुनः बोला हे दयालु नौजवान! कृपा करें और मुझे नदी के पानी में छोड़ दें क्योंकि मैं आग की तपिश से झुलस गया हूँ अगर आप मुझे ज़मीन पर रखोगे तो मैं ज़ख्मी हो जाऊंगा । लड़का साँप को उसी पास बहती नदी में ले गया ।साँप थोड़ा और आगे , थोड़ा और आगे करते- करते नौजवान को नदी के बीचोंबीच ले गया। अचानक साँप ने पूरे ज़ोर से लड़के को अपनी गिरफ्त में लिया और एक झटके में नदी के अंदर उसे खींच कर ले गया । बहुत नीचे पानी में नागलोक में लड़का और वो साँप पहुंच गए ।

भाग–2

नागलोक में पहुंचते ही साँप की शक्ति हज़ार गुना बढ़ गई और वीर नौजवान चारों तरफ करोड़ों साँपों को देख कर पत्ते की तरह कांपने लगा । नौजवान ने कातर स्वर में कहा कि हे नागराज मेरी नेकी का आपने मुझे अच्छा बदला दिया । आप की सहायता करना मुझे भारी पड़ गया । चारों तरफ फुफकारते सांप अपने राजा सांप को देख कर प्रसन्नता से झूम रहे थे परंतु उसके साथ आए मानव को देख कर डसने को उतावले भी हो रहे थे । नागराज ने सब का अभिवादन स्वीकार करने के बाद सबको आपबीती सुनाई और सब को उस नौजवान की नेकी के बारे में बताया । सभी नाग नागिनें लड़के के सामने नतमस्तक हो गए । नागराज ने कहा कि इस नौजवान के अहसान का बदला चुकाने के लिए मैं इसे नागलोक में खींच लाया हूं ।

To be continue–हमारे साथ बने रहें ,प्रतिदिन इस कहानी का अगला अंक प्रकाशित किया जायेगा….

 नवीन किरण
हिन्दी अध्यापिका ,करतारपुर
जालंधर।

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4 COMMENTS

  1. बड़ी मज़ेदार कहानी । बचपन में ऐसी ही तिलस्म की कथाएँ खूब पढ़ीं । बधाई कथा के लिये ।आगे की उत्सुकता है । स्कूल में कहानी सुनाने वाली मैम के नाम से जानी जाती थी । पढ़ लूँ फिर सुनाऊँगी ।बधाई किरण जी

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