आओ फ़िर जिंदा होते हैं

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आओ फ़िर जिंदा होते हैं 

       (डॉ.शशि जोशी “शशी “)

कुछ सपने जो मरे हुए हैं ,
या भीतर से डरे हुए हैं ।
उनमें नई सांस बोते हैं..
आओ ! फ़िर जिंदा होते हैं !
समय गवाही देता सबकी ,
कर्म सदा आगे आते हैं ,
कष्टों से जो हार मानते ,
टूटन ,चोट ,घुटन पाते हैं !
कोई ऐसे भी न टूटे ,
खिलें रहें सारे गुल बूटे !
जहरीले सर्पों से लिपटे ,
हम चंदन का वन होते हैं !
आओ फ़िर जिंदा होते हैं !

क्यों भीतर अंधियारा पालें ?
क्यों न दिल का दीप जला लें ?
कठिनाई से क्योंकर भागें ??
क्यों न हर पल…हर क्षण जागे ?

संकल्पों के दिये जला के ,
पत्थर में भी फूल खिला के ,
अपनेपन के सभी घरों में ,
उन्हें जगाएं ,जो सोते हैं
आओ !फ़िर जिंदा होते हैं !
(डॉ.शशि जोशी सल्ट,अल्मोडा,उत्तराखंड )

 

         संक्षिप्त परिचय
——————————-

नाम -डॉ.शशि जोशी “शशी “
जन्मतिथि – 17/01/1975
माता /पिता -स्व.श्रीमती दुर्गा जोशी एवम श्री मनोहर दत्त जोशी
जन्मस्थान -लोहियाहैड ,खटीमा
जिला -ऊधमसिंह नगर (उत्तराखण्ड )
लेखन विधा -कविता ,कहानी…समीक्षा…आलेख !
प्रकशित पुस्तकें -1- नई उड़ान (ग़ज़ल संग्रह )
2-गीत मेरे सबके लिये (कविता संग्रह )
3-झरोखा चंद ग़ज़लों का
4-हिंदी ग़ज़ल का समीक्षात्मक अध्ययन ( शोध पुस्तक )
5-राम की शक्तिपूजा और संशय की एक रात (शोध पुस्तक )

अमर उजाला,दैनिक जागरण ,पंजाब केसरी,कथादेश ,अभिनव प्रयास आदि अनेकानेक पत्रों एवम पुस्तकों में रचना प्रकाशन !
विभिन्न साहित्यिक ,सामाजिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत व सम्मानित ।

सम्प्रति -एल.टी हिंदी
जी.जी.एच.एस.बाँगीधार ,सल्ट ,
अल्मोडा (उत्तराखंड )
पिन -263676

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1 COMMENT

  1. नि: संदेह ! बहुत प्रशंसनीय ! स्तुत्य कार्य को सम्पादित कर रही हैं आप !
    मेरी अनन्त मंगल कामनाएं स्वीकारें !

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