आज़ादी है

5
473

Loading...
SHARE
Previous articleपंजाबी टैली फिल्म के लिये नव कलाकारों को किया गया उत्साहित :नरेंद्र राय(प्रोड्यूसर)
Next articleप्रेम गीत लिख ही नहीं पाती हूँ
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

5 COMMENTS

  1. हिमांशु भाई ने आज़ादी है व्यंग्य कविता द्वारा आज की खुली छूट पर शानदार कटाक्ष किया है । हर ग़लत काम की आज़ादी है । बधाई पैनी कविता के लिये ।

  2. बहुत शानदार व्यंग्य किया है आज़ादी पर। बहुत बधाई हिमांशु भाई जी।

  3. आज के समाज पर कटाक्ष करती हुई बेहतरीन कविता ।
    बधाई

    आपने बहुत ही अच्छा स्वर दिया बधाई पूर्णिमा जी

  4. बहुत बहतरीन रचना वास्तव में आज की वास्तविकता को दर्शाती ,बहुत शानदार व्यंग आजादी पर किया है बधाई।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here