“सत्य, शिव, सुंदर”

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         “सत्य, शिव, सुंदर”

                नीरजा मेहता,गाजियाबाद

पत्थर के गोल चकले पर
लाल सिकी रोटी सदृश
चमकता सूर्य बिम्ब
उसके खूबसूरत
नर के नारंगी
प्रीत के पीत
के मिलेजुले वर्ण पर
आकर्षित हो
मानव प्रेम के रंग में
रंगा हुआ
जलार्पण कर
प्राणायाम की
योग मुद्रा में
ध्यान मग्न हो जाता है।

कुछ पा लेने की चाह से
स्वयम को मुक्त कर लेता है
और आँखें बन्द कर
स्वयं को
अनन्य उपासना में
लीन कर
स्वयं को देवत्व रूप में
देखते हुए
ईश्वरीय भाव मन में लिए
सत्य, शिव और सुंदरता के
असीम आनन्द से
सराबोर हो जाता है,
ये देख लगता है मानों
हर मानव में
ईश्वर का वास है।

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1 COMMENT

  1. सत्यम् शिवम् सुंदरम् सुंदर कविता के लिये नीरजा मेहता
    जी को बधाई ।

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