आज लड़ना सीख लो

0
128

           आज लड़ना सीख लो

 (कैलाश सोनी सार्थक गीतकार)

रोज कुदरत ये बताती प्रेम करना सीख लो
प्रीत की राहें सुहानी उसपे चलना सीख लो

भोर ये संदेश देती आज फिर कोशिश करो
काम जैसा आप तो वैसा ही ढलना सीख लो

जो गया उसको न रोओ आ रहा पूजो उसे
पल खुशी के जिंदगी में आप भरना सीख लो

दोष देना छ़ोड दो तुम ध्यान खुद पे दो जरा
क्या गलत हमसे हुआ ये ध्यान धरना सीख लो

भागते गम से रहे तो जीत गम को ही मिले
जंग ये गम से चलो तुम आज लड़ना सीख लो

जो किसी को आप दोगे वो मिलेगा आपको
है समय की इक कसौटी उसपे कसना सीख लो

राम सा बेटा बनो तुम श्याम सी लीला करो
आज से “सोनी” सदा गीताजी पढ़ना सीख लो

कैलाश सोनी सार्थक,गीतकार

Loading...
SHARE
Previous articleहाँ,क्षितिज हूँ मैं
Next articleअवकाश
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here