अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-21जून2017 (Dr.Purnima Rai)

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     अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 

(21 जून,2017 )डॉ.पूर्णिमा राय

Dr.Purnima Rai,Asr

योग चित्त की वृत्तियों को संयमित करता है,उनका शुद्धिकरण करके जहाँ मानव को एक विशेष आनंदानुभूति करवाता है वहीं सकल संसार को विश्व बंधुत्व की भावना से सराबोर करता है। 200 ई.पूर्व महर्षि पतंजलि ने योगसूत्र की रचना करके इसे आठ अंगों—यम,नियम,आसन,प्राणायाम,प्रत्याहार,धारणा ,
ध्यान और समाधि में श्रेणीबद्ध किया।महात्मा बुद्ध का अष्टांगिक मार्ग भी इसी राजयोग के अंतर्गत माना जाता है।संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को “अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस” के रुप में मनाने का प्रचलन किया।
कहते हैं—–.तंदरुस्त शरीर में तंदरुस्त दिमाग वास करता है। अक्षरश:सत्य है।मेरी क्यूरी एक बार बहुत बीमार हो गई,उनकी पढ़ाई में यद्यपि बहुत रुचि थी,फिर भी उनके स्वास्थ्य को मद्देनज़र रखते उनके पिता ने कहा था..एक साल पढ़ाई को छुट्टी दे दो,आराम करो।आज की भागदौड भरी जीवनशैली में व्यायाम,कसरत,योग को समयाभाव में अनदेखा किया जा रहा है।अधिकतर लोग बीमारियों का शिकार हो रहे हैं,खानपान एवं रहन-सहन सही न होना,प्रदूषण की मार,दिन प्रति दिन बढ़ रही व्यस्तताएं इत्यादि …और भी बहुत से कारण शारीरिक एवं मानसिक तनाव ,स्वास्थ्य बिगाड़ के जिम्मेदार हो सकते हैं।जब भी कोई दिवस आता है तो अक्सर लोगों को कहते सुना जाता है —एक दिन क्यों ??यां यह भारतीय संस्कृति से अलग दिन है ??समझ नहीं आता,भई अगर एक दिन ही हम सब एक जुट होकर मानवता हेतु,अपने स्वास्थ्य हेतु,अपने अपनों के लिये
कुछ कर सकें तो क्या बुराई है।वैसे भी अच्छी बातें हम कौन सी रोज़ याद रखते हैं,मानव की फितरत है कि वह बुरी बातों की ओर यां जिन पर बंदिश लगाई जाये,वह कार्य करके आनंदित होता है ।एकत्व में जो आनंद है ,वह बिखराव में कहाँ।हम इस शरीर के लिये,आत्मिक सुख के लिये भटकते हैं,और योग कहता है ,मुझे अपना लो,सर्वस्व प्राप्त कर लोगे।यह तो समझने की बात है,जो समझ गया ,वह जग जीत गया। चलिये इसी संदर्भ में मेरे विचारों को जानने के साथ-साथ मेरे लिखे दोहों का भी आनंद लीजिये—

दोहे

योगा करते दिख रहे ,आज विश्व के लोग।
ध्यान लगा के कर रहे, दूर हृदय के रोग।१
आठ अंग कुल योग के ,मार्ग बुद्ध अष्टांग।
आसन प्राणायाम कर,व्यर्थ न रच मन स्वांग।२
यम,समाधि औ’ ध्यान से,साँसें बढ़ जायें चंद।
चित्त वृत्ति भी शुद्ध हो,मिलता परमानंद।।३
योग नियम औ’ धारणा ,ले आये संतोष।
तप स्व-अध्याय केंद्र में,बढ़े ज्ञान का कोश।४
बिन शिक्षा योगा करें ,लग जायेंगे रोग।
तन-मन पावन है बने, करें समझ से योग।।५
आत्मा को मिलती खुशी,सीखें जीवन ढंग।
खिलते चेहरे योग से,देख सभी हों दंग।।६
ऋषि पतंजलि के योग की,महिमा अपरंपार।
विषय वासना मुक्त ही,दिखे सकल संसार।७
राजयोग की देन का,गुण गाये इन्सान
मानवता के नूर से,दीपित है भगवान।।८
स्वर्ग धरा पर ही मिले,मोह “पूर्णिमा” पाश।
योग साधना में छिपा ,जीवन का सारांश।। ९
डॉ.पूर्णिमा राय,
शिक्षिका एवं लेखिका
अमृतसर(पंजाब)
drpurnima01.dpr@gmail.com
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