मैं तो बहता दरिया हूँ

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 मैं तो बहता दरिया हूँ  (गीत)  

         (राहुल द्विवेदी”स्मित”)

राहुल द्विवेदी “स्मित”

मेरी कहाँ जरूरत किसको, मैं तो बहता दरिया हूँ ।
जो चाहे बस प्यास बुझा ले, सस्ती एक गगरिया हूँ ।।

सबने अपने दाग छुड़ाये, मुझको तनहा छोड़ दिया…
अपने मन की नीच गली से, मेरा नाता जोड़ दिया…।
जिस पर लाखों दाग लगे हैं, ऐसी एक चुनरिया हूँ….
मेरी कहाँ………..।।

सच का गीत सुनाता फिरता, झूठी दुनियादारी में…
सब हँसते हैं मैं भी खुश हूँ, अपनी इस बेकारी में …।
जिसको सबने ठुकराया है, सच की एक नगरिया हूँ……
मेरी कहाँ……………।।

जब तारों को पड़ी जरूरत, छोड़ दिया आकाश घना…
लाचारी के घोर तिमिर में, मैं मतवाला खूब जला….।
आज उजालों ने समझाया, मैं तो केवल जरिया हूँ…..
मेरी कहाँ जरूरत किसको…….।।

राजनीति के दांव के आगे, मैंने घुटने टेक दिए….?
खुद्दारी में सहनशीलता, वाले मोती फेंक दिए ।
संविधान की हरियाली में, मैं केवल केसरिया हूँ……
मेरी कहाँ जरूरत किसको………….।।

विशेष —22 22 22 22, 22 22 22 2
16-14 के लावणी छंद पर आधारित

राहुल द्विवेदी ‘स्मित’,लखनऊ

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2 COMMENTS

  1. राहुल द्विवेदी जी का मैं तो बहता दरिया हूँ बहुत सुन्दर गीत बधाई ।

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