सप्तभंगी गौरेया (क्षणिकाएं)

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सप्तभंगी गौरैया !!

गौरैया एक बच्ची है 

फ्रॉक फैलाकर 

आँगन में फुदकती है (1)

 फिर फिर लौट आती 

गौरैया कोई याद है 

बार बार चहचहाती (2)

 गौरैया 

एक जीवंत सांस है 

चुप चुप कमरे की 

मौन आवाज़ है (3)

 स्थिर होने के लिए 

फड़फड़ाती 

गौरैया एक बेचैनी है 

तड़प तड़प जाती (4)

 गौरैया एक लड़का है 

दर्पण के सामने       

डिबेट की तैयारी करता है(5)

 बूंद बूंद पीती 

एक अनवरत कोशिश है जीती 

अथक गौरैया (6)

 रोंयेदार तौलिए से 

बाल झटकारती 

गौरैया नहाई लड़की है 

शरारती (7)

 -डा. सुरेन्द्र वर्मा, (मो. ९६२१२२२७७८)
१०, एच आई जी / १, सर्कुलर रोड, 
इलाहाबाद -२११००१  
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1 COMMENT

  1. बेहतरीन भावनाओं.की उम्दाभिव्यक्ति!!बड़ी खूबसूरती से अंदाज ए गौरेया को पेश किया आपने आ.डॉ.सुरेन्द्र वर्मा जी!! हार्दिक आभार एवं नमन!!

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