कवि शमशेरबहादुर सिंह

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कवि शमशेरबहादुर सिंह 

कवियों के कवि शमशेर को पढ़ते हुए सबसे पहले उनकी काव्यभाषा का सामना कौतूहल से भर देता है| वे शब्द – प्रयोग व उसके संस्कार के मर्मी कवि माने जाते हैं| कविता मे बिम्ब विधान के मामले में वे दूसरे सप्तक के अन्य सभी कवियों से वे जुदा हैं| उनका तेवर मखमली है| वे अंग्रेजी कवियों के दृश्य विधान व उर्दू साहित्य के भाषाई कलेवर को लेकर आधुनिक कविता के विशिष्ट कवि हैं…|
उनकी दो कविताएं——

*घिरते आकाश को*

घिरते आकाश को ताकता हताश :
गहरे नभ में चाँद खोता जाता है;
अंधकार
चुप-चुप हँसता आता सब ओर |
…..
*रुबाई*

हम अपने खयाल को सनम समझते थे
अपने को खयाल से भी कम समझते थे
होना था… समझना न था कुछ भी ‘ शमशेर’
होना भी कहां था वो जो हम समझते थे|
……
जब लोग कविता को छोटी या बड़ी कविता कहते हैं तो हँसी के साथ साथ उनकी कविता संबंधी समझ पर तरस आता है|
कविता में कथ्य की भंगिमा व उससे बनने वाली छवियों के विस्तार मे क्यों नहीं उतरते लोग|
मैंने कहीं लिखा….
दु:ख – सुख दोनों
दोनों पैर के जूते हैं|

सन्तोषकुमार तिवारी,नैनीताल

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