शब्दों का सौदागर (गीत)

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शब्दों का सौदागर ( गीत )
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मैं शब्दों का इक सौदागर……,नगर तुम्हारे आया हूँ ।
सौ दुक्खों की एक दवाई,……लिये तुम्हारे लाया हूँ ।।

मेरे इन शब्दों में तुमको ,जन जीवन का सार मिले ।
सुनकर उपजे परम शान्ति,मन भावन संसार मिले ।।
सोच को नव विस्तार मिले,भ्रम का हटाता साया हूँ ।
सौ दुक्खों की एक दवाई, ……लिये तुम्हारे लाया हूँ ।

कैसी भी हो मन में पीड़ा,हर रोग को मैं लेता हूँ हर ।
कड़वी यादें याद न आयें,नही सताये भविष का ड़र ।
जाते सब हालात सुधर,..शब्दों से रँगता काया हूँ ।।
सौ दुक्खों की एक दवाई,…….लिये तुम्हारे लाया है ।
खुली आँख का है जग सपना,चक्षु ज्ञान के खोल जरा 
संग तुम्हारे ही ये जन्मा….,और तुम्हारे  संग मरा ।।
भौतिकता ने चित्त हरा.,..मैं हरता भौतिक माया हूँ ।।
सौ दुक्खों की एक दवाई,…….लिये तुम्हारे लाया हूँ
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साधक कर्मों के गर्भ में….,छिपे भविष्य के परिणाम ।
काले कर्म दुक्ख हैं देते,….सुख देते कर्म निष्काम ।।
 माँ का आँचल थाम चलूँ ,मैं सरस्वती का जाया हूँ ।
सौ दुक्खों की एक दवाई,…….लिये तुम्हारे लाया हूँ ।

गीतकार सुरेन्द्र साधक ( दिल्ली )– 9899494586

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