मैं प्रेमगीत लिखना चाहती हूँ :संक्षिप्त विवेचन

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 मैं प्रेमगीत लिखना चाहती हूँ :संक्षिप्त विवेचन                     (संतोष कुमार तिवारी)

 

शिक्षिका के साथ साथ कवयित्री श्रीमती शेफाली पाण्डे की सद्य:प्रकाशित काव्यकृति : मैं प्रेमगीत लिखना चाहती हूँ: में जिस प्रकार से समकालीन यथार्थ का चित्रण एवं आदर्श की परिकल्पना कवयित्री ने की है , वह सचमुच उल्लेखनीय है | कुल साठ कविताओं की कृति में प्रेमगीत न्यून है| वे स्त्री मन की करुणा व सहनशीलता को खासकर अपनी कविताओं में काफी’ स्पेस’ देते हुए उसके पहाड़ जैसे दु:ख के बावजूद उसकी अदम्य जिजीविषा को नमन करना नहीं भूलतीं|

वे लिखती हैं….
तीस की उम्र में पचास की लगती हैं
पहाड़ की औरतें उदास सी लगती हैं|
कवयित्री को कविता रचने के लिए इर्द गिर्द के परिवेश से लेकर देश देशान्तर की घटनाएं, मानवमूल्यों में तेजी से आई गिरावट उन्हें बहुत व्याकुल करता है| शेफाली जी की कविताओं में प्रेमऔर आक्रोश का अद्भुत मेल उनकी कविकर्म की बड़ी खूबी है|सरल – सहज लहजे में सब कुछ देने वाली कविताओं की आज सबसे ज्यादा जरूरत है |छायावाद के शीर्ष कवि , जिन्हें प्रकृति के सुकुमार कवि के नाम से दुनिया जानती है।एेसे कविवर सुमित्रानंदन पंत के परिवार की बेटी शेफाली की कविताएं बहुत शीघ्रता से साहित्य व समाज में अपनी पहचान बनाने मे सफल हैं|
उनकी सतत् साहित्य साधना
निर्बाध गति से जारी रहे| यही मंगलाशा …|

मैं प्रेमगीत लिखना चाहती हूँ
आरती प्रकाशन,लालकुँआ
मूल्य…180 रूपये

सम्प्रति…राइका छोई में अध्यापन|

समीक्षक……..
सन्तोष कुमार तिवारी
प्रवक्ता, राइका ढिकुली
नैनीताल
9456137315

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