संत कबीर जयंती (9जून 2017)

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संत शिरोमणि: कबीर

संतों की पद्धति का जिक्र जब भी,
इतिहास देवी सदैव दोहरायेगी।
ज्ञानमार्गी, समाज सुधारक एवं संत शिरोमणि,
‘संज्ञा’ सर्वश्रेष्ठ स्मरण हो जाएगी।
सन् तेरह सौ अट्ठानवें में,
काशी में जिसने जन्म लिया
बाबा ‘नीमा’ ने दिया निवाला
‘नीरू’ धाय ने पोषण किया।
बिन देखे ही किवाड़ मदरसे के,
अनेकों ग्रंथ उसने थे गढ़ डाले।
पोथी का ज्ञान रख एक तरफा,
सबके मन में स्नेह मोती, हौले से थे जड़ डाले।
रख रूढ़िवादिता निशाने पे,
आडम्बरों का भी चीरहरण किया।
दे सीख सुमति, सुमार्ग की,
पावन था, हरेक कर्ण किया।
सच्चखंड वासी होने पर भी ,
समस्त विश्व ने महिमा गायी है।
इनकी कृतियों की महक अक्सर,
श्री हरि मंदिर से आयी है।
बहुमूल्य ज्ञान के अंश, रूप हित,
गुरू ग्रंथ साहिब में समायी है।
नवयुवकों की ज्ञान पिपासा शान्ति हित,
बीजक’ ‘जल मश्क’ सम जानी जाएगी।
“क्यामपुरियन” शिक्षा धारण किए बिन,
जिंदगी बेमानी कहलाएगी।

सुखदेव क्यामपुरियन
हिन्दी शिक्षक,अमृतसर।
Mrphindiasr@gmail.com

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1 COMMENT

  1. अचिन्त साहित्य की ओर से सभी को संत कबीरदास जी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में हार्दिक बधाई!!

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