जलियाँवाला कांड (कविता)

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      जलियाँवालावाला कांड

पर्व सुनहरा बैसाखी का
सभा चल रही,बगिया में
था विरोध रौलेट-एक्ट का
नही भूलता दिन तारीखों में….

तीनओर से बंद बगिया
खुला एक दरवाजा था
मिली सूचना ,डायर को
दना-दन गोली बरसाया था…..

चीख-चित्कार गूँज उठी
भगदड़ मची बीच सभा में
खून की नदियाँ बह उठी
लाशें बिछ गई इस धरा में……

चिर निद्रा में सोई लाशें
हवा सहलाती जख्मों को
बसंत बयार बन औषधि
धरती ने चिपटाया लाशों को….

क्या दोष जो बेमौत मरे
निर्मोही के ग्रास बने
दर्द भरी आहें सुनकर
हर प्राणी शत शोक भरे….

थे सभा में मासूम भोले,
नर-नारी और वीर जवान
शांत सभा में गोली दागी
दफन किये सारे अरमान…..

दर्द – बिलखती चीखों से
ऋतु बसंत भी रो पड़ा
अपने यौवन की चादर से
कफ़न उनको दिया उड़ा….

बिखरे फूलों की सेज बनी
पावन हुई धरा शहीदों से
सारी दुनियां बिलख गई
गोरों के घृणित – कृत्यों से…..

मंजू चम्याल ‘स्मृति’
प्रधानाध्यापिका (एडेड जूनियर स्कूल )
पता –खटीमा राजीव नगर
( उधमसिंह नगर )
उत्तराखंड
पिन न. 262308
संपर्क न. –9917519922

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